MP News: कान्हा में फिर बाघ की मौत, टेरेटरी की जंग बनी वजह!

दैनिक सांध्य बन्धु (एजेंसी) मंडला। मंडला जिले स्थित कान्हा टाइगर रिजर्व में बाघों की मौत का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है। सोमवार सुबह किसली रेंज के मगरनाला क्षेत्र में 4 वर्षीय नर बाघ का शव मिलने से हड़कंप मच गया। ‘डिगडोला मेल’ के नाम से पहचाने जाने वाले इस बाघ की मौत आपसी संघर्ष में होने की आशंका जताई जा रही है।

10–12 घंटे पहले हुई मौत

टाइगर रिजर्व के उप निदेशक (कोर) प्रकाश कुमार वर्मा के अनुसार, बाघ की मौत करीब 10 से 12 घंटे पहले हुई है। गश्ती दल को सुबह शव मिला, जिसके बाद वन विभाग, डॉग स्क्वायड और अन्य टीमों ने मौके पर पहुंचकर जांच शुरू कर दी है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट के बाद ही मौत के सटीक कारणों की पुष्टि हो सकेगी।

दूसरे बाघ की तलाश तेज

वन विभाग ने उस दूसरे बाघ की तलाश शुरू कर दी है, जिससे संघर्ष की आशंका है। हाथी गश्ती दल के जरिए पूरे इलाके में सर्च ऑपरेशन चलाया जा रहा है, ताकि यह पता लगाया जा सके कि दूसरा बाघ घायल तो नहीं है। घटनास्थल को सुरक्षित कर जरूरी साक्ष्य जुटाए जा रहे हैं।

अप्रैल में ही 6 बाघों की मौत

कान्हा टाइगर रिजर्व में बीते अप्रैल माह में ही 6 बाघों की मौत हो चुकी है। इनमें 5 अप्रैल को बाघिन सुनैना और 29 अप्रैल को बाघिन टी-141 व उसके शावक की मौत शामिल है। लगातार हो रही इन घटनाओं से पार्क प्रबंधन की निगरानी और सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े हो रहे हैं।

विशेषज्ञों के मुताबिक, एक नर बाघ को अपनी टेरेटरी के लिए लगभग 36 वर्ग किमी क्षेत्र की जरूरत होती है। इसमें 12 वर्ग किमी ऐसा इलाका होता है, जहां अन्य बाघ आ सकते हैं, लेकिन बाकी 24 वर्ग किमी उसका निजी (एब्सोल्यूट) क्षेत्र होता है। यही वह इलाका होता है, जिसकी रक्षा के लिए बाघ किसी भी हद तक जा सकता है — और अक्सर यही संघर्ष मौत का कारण बन जाता है।

सवालों के घेरे में सुरक्षा व्यवस्था

लगातार हो रही बाघों की मौत ने वन विभाग की कार्यप्रणाली और निगरानी सिस्टम पर सवाल खड़े कर दिए हैं। अब सबकी नजर पोस्टमार्टम रिपोर्ट और वन विभाग की विस्तृत जांच पर टिकी है।

Post a Comment

Previous Post Next Post