Jabalpur News: हाईकोर्ट के हस्तक्षेप के बाद घमापुर-आंबेडकर चौक फ्लाईओवर परियोजना में तेजी, घमापुर से हटेंगे अतिक्रमण

दैनिक सांध्य बन्धु जबलपुर। शहर के पूर्व विधानसभा क्षेत्र में लंबे समय से लंबित फ्लाईओवर निर्माण की प्रक्रिया में अब नया मोड़ आ गया है। घमापुर, आंबेडकर चौक और आसपास के इलाकों में रोजाना लगने वाले भीषण ट्रैफिक जाम को लेकर विधायक लखन घनघोरिया द्वारा दायर जनहित याचिका (16145/2025) पर हाईकोर्ट की सख्ती के बाद प्रशासनिक गतिविधियां तेज हो गई हैं। सोमवार, 31 अगस्त को हुई अहम सुनवाई के दौरान राज्य सरकार ने कोर्ट को अवगत कराया कि पूरे रूट का ट्रैफिक डेटा एकत्र कर लिया गया है और सड़क चौड़ीकरण के लिए विस्तृत प्रस्ताव तैयार किया जा रहा है।

हाईकोर्ट ने सुझाया नया रूट, कई प्रमुख चौराहों को मिलेगी राहत

परियोजना के रूट को लेकर हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण सुझाव दिया है। कोर्ट ने फ्लाईओवर को एमपी टूरिज्म कार्यालय से शुरू कर घमापुर चौराहे के आगे उतारने का विकल्प सामने रखा है। यदि इस रूट को हरी झंडी मिलती है तो घमापुर, आंबेडकर चौक, कलेक्ट्रेट चौराहा, हाई कोर्ट और जिला न्यायालय के सामने से गुजरने वाले वाहनों का भारी दबाव कम हो जाएगा। इससे पहले शुरुआती योजना होटल ऋषि एजेंसी से शुरू होकर राध्ही चौकी और अब्दुल हमीद चौक तक प्रस्तावित थी, जिस पर अंतिम निर्णय अगली सुनवाई में होने की उम्मीद है।

घमापुर में हट सकते हैं कई अतिक्रमण

फ्लाईओवर निर्माण के साथ ही घमापुर क्षेत्र में चौड़ीकरण की जद में आने वाले अवैध निर्माणों पर गाज गिरना तय माना जा रहा है। सरकार ने प्रभावित निर्माणों का आकलन शुरू कर दिया है। वहीं सुनवाई के दौरान एल्गिन अस्पताल के आसपास गुमटी लगाने वाले छोटे दुकानदारों ने अपनी दुकानों को राहत देने की याचिका लगाई थी, जिसे हाईकोर्ट ने स्पष्ट रूप से खारिज कर दिया। कोर्ट के इस रुख से साफ संकेत मिलता है कि नियमों के विपरीत बने अतिक्रमणों पर जल्द ही बुलडोजर कार्रवाई शुरू होगी।

लागत बढ़कर 269 करोड़ हुई, विधानसभा में बार-बार उठा था मुद्दा

याचिका के अनुसार, इस परियोजना का पहला प्रस्ताव 11 दिसंबर 2019 को 186.03 करोड़ रुपये का भेजा गया था। प्रशासनिक सुस्ती के कारण देरी होने से 28 जुलाई 2022 को इसकी अनुमानित लागत बढ़कर 269.22 करोड़ रुपये हो गई। विधायक लखन घनघोरिया ने अगस्त 2021 से लेकर दिसंबर 2024 तक विधानसभा में कई बार सवाल उठाए और मुख्यमंत्री को ज्ञापन भी सौंपा, लेकिन ठोस नतीजा न निकलने पर उन्हें हाईकोर्ट का रुख करना पड़ा। अब सभी की निगाहें अगली सुनवाई पर टिकी हैं, जहां फ्लाईओवर के अंतिम रूट और निर्माण कार्य की समय-सीमा तय होगी।

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