दैनिक सांध्य बन्धु जबलपुर। नगर निगम जबलपुर के नेता प्रतिपक्ष अमरीश मिश्रा और पूर्व पार्षद जितिन राज ने मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव को ज्ञापन सौंपकर शहर में प्रस्तावित 3.81 किलोमीटर लंबे फ्लाईओवर का निर्माण मूल स्वीकृत स्वरूप में कराने की मांग की। उन्होंने परियोजना के स्वरूप में प्रस्तावित बदलाव पर चिंता व्यक्त करते हुए सरकार से जनहित में पुनर्विचार करने का आग्रह किया।
नेता प्रतिपक्ष अमरीश मिश्रा और पूर्व पार्षद जितिन राज ने बताया कि मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने 3 जनवरी 2024 को जबलपुर प्रवास के दौरान कृषि उपज मंडी से दीनदयाल चौक, आईटीआई चौक होते हुए पाटन एवं कटंगी रोड तक लगभग 3.81 किलोमीटर लंबे फ्लाईओवर के निर्माण की घोषणा की थी। इस परियोजना के लिए वर्ष 2024-25 के अनुपूरक बजट में 441.87 करोड़ रुपये का प्रावधान भी किया गया था। उस समय इसे शहर के सबसे व्यस्त मार्ग पर यातायात जाम की समस्या के स्थायी समाधान के रूप में देखा गया था। अब यह जानकारी सामने आ रही है कि प्रस्तावित 3.81 किलोमीटर लंबे फ्लाईओवर के स्थान पर केवल लगभग एक किलोमीटर का एलिवेटेड कॉरिडोर बनाए जाने की तैयारी है।
उनका कहना है कि यदि ऐसा किया गया तो परियोजना का मूल उद्देश्य प्रभावित होगा और कृषि उपज मंडी, आईएसबीटी, आईटीआई चौक, कटंगी रोड, पाटन रोड सहित आसपास के क्षेत्रों में वर्षों से चली आ रही ट्रैफिक जाम की समस्या का स्थायी समाधान नहीं हो पाएगा। यह मार्ग जबलपुर का प्रमुख प्रवेश द्वार है, जहां प्रतिदिन हजारों बसें, मालवाहक वाहन और निजी वाहन गुजरते हैं। ऐसे में भविष्य की यातायात आवश्यकताओं को देखते हुए पूर्ण लंबाई का फ्लाईओवर ही व्यावहारिक और स्थायी समाधान है। उनका कहना था कि अधूरे या छोटे फ्लाईओवर अक्सर जाम को समाप्त करने के बजाय अगले चौराहे तक स्थानांतरित कर देते हैं, जिससे समस्या और गंभीर हो जाती है। करमेता, शंकर नगर, विजय नगर, मदर टेरेसा कॉलोनी, कृषि उपज मंडी, आईएसबीटी, कटंगी और पाटन क्षेत्र तेजी से विकसित हो रहे हैं। आने वाले वर्षों में इन इलाकों में आबादी और वाहनों की संख्या में और वृद्धि होगी। ऐसे में परियोजना का दायरा घटाना भविष्य की जरूरतों के अनुरूप नहीं होगा।
मुख्यमंत्री से मांग की गई कि 3.81 किलोमीटर लंबे फ्लाईओवर का निर्माण मूल स्वीकृत योजना के अनुसार कराया जाए। साथ ही परियोजना में किए गए बदलाव के कारणों को सार्वजनिक किया जाए तथा यदि तकनीकी कारणों से डिजाइन में परिवर्तन आवश्यक हो तो यातायात विशेषज्ञों की सलाह और जनहित को ध्यान में रखते हुए ऐसा समाधान तैयार किया जाए, जिससे शहर को दीर्घकालिक ट्रैफिक राहत मिल सके। इसके अलावा परियोजना की प्रगति और अंतिम स्वरूप की जानकारी भी पारदर्शी तरीके से आम जनता के सामने रखने की मांग की गई।
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