दैनिक सांध्य बन्धु जबलपुर। रीवा में जैन साध्वियों को कार से कुचलने की घटना के विरोध में सोमवार को संस्कारधानी जबलपुर में जैन समाज ने मौन जुलूस निकालकर संतों की सुरक्षा को लेकर कड़ा संदेश दिया। राष्ट्रीय संत सुरक्षा अभियान के बैनर तले बड़ी संख्या में महिलाएं, पुरुष और बच्चे कमानिया गेट से घंटाघर तक मौन जुलूस में शामिल हुए। इसके बाद प्रधानमंत्री के नाम तहसीलदार को ज्ञापन सौंपकर संत सुरक्षा कानून बनाने की मांग की गई।
जैन समाज के लोगों ने कहा कि 20 मई को रीवा में पैदल विहार कर रही तीन जैन साध्वियों को एक अनियंत्रित कार ने टक्कर मार दी थी। इस दर्दनाक हादसे में आर्यिका श्रुतमति माताजी और सुमति माताजी का देवलोकगमन हो गया, जबकि एक अन्य साध्वी गंभीर रूप से घायल हैं। समाज का कहना है कि यह केवल एक दुर्घटना नहीं, बल्कि मानवता को झकझोर देने वाली घटना है।
प्रदर्शनकारियों ने आरोपी कार चालक के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग करते हुए कहा कि साधु-संत अहिंसा, संयम और शांति का संदेश देने वाले तपस्वी होते हैं, लेकिन उनके साथ लगातार हो रही दुर्घटनाएं और हमले गंभीर चिंता का विषय हैं। समाज ने सरकार से साधु-संतों के विहार के दौरान विशेष सुरक्षा व्यवस्था सुनिश्चित करने और संत सुरक्षा कानून लागू करने की मांग की।
मौन जुलूस में शामिल श्वेता जैन ने कहा कि रीवा की घटना बेहद दुखद और पीड़ादायक है। साध्वियों की मौत के लिए जिम्मेदार लोगों को कड़ी सजा मिलनी चाहिए। वहीं अलका जैन ने कहा कि जैन समाज लंबे समय से विभिन्न प्रकार की उपेक्षा और दुर्व्यवहार का सामना कर रहा है, इसलिए अब संतों की सुरक्षा के लिए विशेष कानून बनाए जाने की आवश्यकता है।
समाजजनों ने ज्ञापन में रीवा हादसे के आरोपी के खिलाफ कठोर कार्रवाई के साथ-साथ ग्राम देवरान से चोरी हुई 11 जैन प्रतिमाओं की जल्द बरामदगी और मामले के खुलासे की भी मांग की।
गौरतलब है कि हादसे के बाद फरार हुए कार चालक रशीद आबाद अली शाह को जबलपुर जिले के बरगी क्षेत्र स्थित बहोरीपार टोल नाके के पास से गिरफ्तार किया गया था। बाद में उसे रीवा पुलिस के हवाले कर दिया गया। आरोपी महाराष्ट्र के नागपुर का निवासी बताया गया है।
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