Jabalpur News: जबलपुर के डॉक्टर ने रची 5 युवकों की हत्या की साजिश! सड़क हादसे के पीछे निकला खौफनाक मर्डर प्लान ;देखें वीडियो

दैनिक सांध्य बन्धु जबलपुर।
भोपाल-जबलपुर नेशनल हाईवे-45 पर 19 जुलाई को नरसिंहपुर जिले के सुआतला थाना क्षेत्र में हुए भीषण सड़क हादसे ने पूरे प्रदेश को झकझोर दिया था। अब इस मामले में पुलिस की जांच ने चौंकाने वाला खुलासा किया है। जिस घटना को अब तक सड़क दुर्घटना माना जा रहा था, वह दरअसल सुनियोजित सामूहिक हत्या थी। इस सनसनीखेज साजिश का मास्टरमाइंड जबलपुर के स्मार्ट सिटी अस्पताल के संचालक डॉ. अमित खरे को बताया गया है। पुलिस ने डॉक्टर सहित आठ आरोपियों को गिरफ्तार किया है, जबकि तीन आरोपी अब भी फरार हैं।

नरसिंहपुर पुलिस अधीक्षक डॉ. ऋषिकेश मीणा ने शनिवार को बताया कि हत्या की वजह आपसी रंजिश और कथित ब्लैकमेलिंग से छुटकारा पाना थी। जांच में सामने आया कि मृतक राजेंद्र पटेल पहले डॉ. अमित खरे के साथ काम करता था। करीब एक साल पहले दोनों के बीच पैसों के लेन-देन को लेकर विवाद हुआ था। इसके बाद राजेंद्र कथित रूप से फर्जी मेडिको-लीगल केस (एमएलसी) के नाम पर डॉक्टर को ब्लैकमेल करने लगा। इसी से छुटकारा पाने के लिए हत्या की साजिश रची गई।

पुलिस के अनुसार, डॉ. अमित खरे ने अपने परिचित और कथित अवैध रेत कारोबारी आनंद सिंह लोधी से संपर्क किया। दोनों ने मिलकर योजना बनाई कि हत्या को सड़क हादसे का रूप दिया जाएगा। योजना के तहत 19 जुलाई को जब राजेंद्र पटेल अपने साथियों के साथ नरसिंहपुर के हाथीनाला वाटरफॉल घूमने गया, तब पहले से घात लगाए आरोपी हाईवा लेकर पहुंचे। जैसे ही राजेंद्र और उसके साथी हाईवे किनारे सेल्फी ले रहे थे, उन पर हाईवा चढ़ा दिया गया। इस घटना में राजेंद्र समेत पांच युवकों की मौत हो गई, जबकि एक युवक गंभीर रूप से घायल है और उसका इलाज जबलपुर में चल रहा है।

मामले की जांच के दौरान घटनास्थल से हाईवा के मोनोग्राम का टूटा हुआ अंग्रेजी का 'A' अक्षर पुलिस के हाथ लगा। यही छोटा सा सुराग पूरे हत्याकांड का सबसे बड़ा सबूत साबित हुआ। पुलिस ने हाईवे पर खड़े कई हाईवा की जांच की और एक वाहन के मोनोग्राम से 'A' गायब मिला। इसके बाद सीसीटीवी फुटेज, तकनीकी साक्ष्य और फोरेंसिक जांच के आधार पर पुलिस जबलपुर जिले के सुंदरदेही, बरपटी और पावला गांव तक पहुंची और जंगल से वारदात में इस्तेमाल हाईवा बरामद कर लिया।

जांच के दौरान राजा पटेल से पूछताछ में पूरी साजिश का खुलासा हुआ। उसने बताया कि अलग-अलग आरोपियों को अलग-अलग जिम्मेदारियां दी गई थीं। कोई राजेंद्र की लोकेशन पर नजर रख रहा था तो कोई आरोपियों को शरण देने का काम कर रहा था। पुलिस ने आनंद सिंह लोधी, अनुज लोधी, डॉ. अमित खरे, अरविंद पटेल, नरेंद्र सिंह, राजा पटेल, भरत सिंह पटेल और अनिल पटेल को गिरफ्तार कर लिया है।

पुलिस की जांच में मोबाइल कॉल डिटेल रिकॉर्ड (सीडीआर) भी अहम सबूत बना। अधिकारियों के अनुसार, वारदात के तुरंत बाद आनंद सिंह लोधी ने सबसे पहला फोन जबलपुर के डॉक्टर अमित खरे को किया। पुलिस का दावा है कि पहली बातचीत में डॉक्टर ने पूछा, "क्या वह मर गया?" इस पर आरोपी ने जवाब दिया कि "अभी सिर हिल रहा है।" कुछ देर बाद दूसरी कॉल में राजेंद्र की मौत की पुष्टि होने पर डॉक्टर ने कथित तौर पर "मातारानी के जयकारे" लगाए।

वारदात के बाद आरोपी जंगलों में छिप गए थे। पुलिस की चार टीमों ने कार्रवाई करते हुए आनंद सिंह लोधी और अनुज लोधी को डोंगरगांव क्षेत्र से गिरफ्तार किया, जबकि जबलपुर के डॉक्टर अमित खरे को दमोह से स्थानीय पुलिस की मदद से पकड़ा गया। पुलिस ने घटना में इस्तेमाल हाईवा, डंपर, महिंद्रा थार, फॉर्च्यूनर और कई मोबाइल फोन भी जब्त किए हैं।

फिलहाल सभी गिरफ्तार आरोपियों को कोर्ट में पेश कर रिमांड पर लिया गया है। वहीं शुभम पटेल, प्रीतम बर्मन और ऋतुराज की तलाश जारी है। पुलिस का कहना है कि मामले में हत्या, आपराधिक षड्यंत्र, साक्ष्य छिपाने सहित अन्य गंभीर धाराओं में कार्रवाई की जा रही है और जांच के दौरान जिन लोगों की संलिप्तता सामने आएगी, उनके खिलाफ भी सख्त कार्रवाई की जाएगी।

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