इंदौर नगर निगम में भ्रष्टाचार पर भड़के MIC सदस्य: डिवाइडर पर ऐसा घटिया पेंट कि पानी डालते ही छूटा; बोले— अफसरों की मिलीभगत से ठेकेदार कर रहे खेल

दैनिक सांध्य बन्धु (एजेंसी) इंदौर। स्वच्छ सर्वेक्षण की तैयारियों के बीच इंदौर में विकास और सौंदर्यीकरण के कार्यों की गुणवत्ता पर गंभीर सवाल खड़े होने लगे हैं। शहर के ब्रिलियंट कन्वेंशन सेंटर से एबी रोड मार्ग पर सेंट्रल डिवाइडरों की रंगाई-पुताई और थर्मोप्लास्टिक कलर पट्टियों के कार्य में बरती जा रही घोर लापरवाही और घटिया निर्माण कार्य को खुद नगर निगम की मेयर इन काउंसिल (MIC) के सदस्य राजेंद्र राठौर ने उजागर किया है। निरीक्षण के दौरान जब काम की गुणवत्ता की पोल खुली तो एमआईसी सदस्य ने मौके पर ही यातायात विभाग के सहायक यंत्री और संबंधित ठेकेदार को तलब कर जमकर फटकार लगाई। उन्होंने निगम के कुछ भ्रष्ट अधिकारियों पर सीधा निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि अफसरों की लापरवाही, मिलीभगत और भ्रष्टाचार के कारण ही ठेकेदार शहरभर में स्वच्छता सर्वेक्षण की आड़ में गुणवत्ताहीन कार्य को अंजाम दे रहे हैं।

मामले का खुलासा उस वक्त हुआ जब एमआईसी सदस्य राजेंद्र राठौर ब्रिलियंट कन्वेंशन सेंटर मार्ग पर चल रहे काम का औचक निरीक्षण करने पहुंचे। वहां डिवाइडर पर हो रहे पेंट को देखकर जब उन्होंने संदेह के आधार पर उस पर पानी डलवाकर हल्का सा रगड़ा, तो पूरा रंग तुरंत उखड़कर बाहर आ गया। यानी सौंदर्यीकरण के नाम पर किया गया यह पेंट पहली ही बारिश या धुलाई में पूरी तरह साफ हो जाता। राठौर ने बताया कि महज कुछ दिन पहले ही बापट चौराहे से राजीव आवास विहार जाने वाले मार्ग के डिवाइडर पर भी इसी तरह की बड़ी अनियमितता और घटिया काम सामने आया था, जहां ऑयल पेंट की जगह बेहद घटिया दर्जे के रंगों का इस्तेमाल किया जा रहा था। लगातार शिकायतें करने के बावजूद स्थिति में कोई सुधार नहीं हो रहा है, जिससे साफ है कि कुछ जिम्मेदार अधिकारी सब कुछ जानकर भी अपनी आंखें मूंदे बैठे हैं और ठेकेदारों की इन बड़ी गड़बड़ियों पर कोई दंडात्मक कार्रवाई नहीं कर रहे हैं।

इस पूरे मामले की गंभीरता को देखते हुए एमआईसी सदस्य ने इंदौर महापौर और निगम आयुक्त को विस्तृत रिपोर्ट सौंपकर वस्तुस्थिति से अवगत कराया है। उन्होंने मांग की है कि शासकीय धन का दुरुपयोग करने वाले और शहर की छवि को नुकसान पहुंचाने वाले ऐसे लापरवाह अधिकारियों व दागी ठेकेदारों के खिलाफ तत्काल प्रभाव से उच्च स्तरीय जांच बैठाई जाए। साथ ही उनके विरुद्ध इतनी सख्त और दंडात्मक कार्रवाई की जाए जो भविष्य के लिए एक नजीर बने, ताकि दोबारा कोई भी इस तरह की वित्तीय अनियमितता और भ्रष्टाचार करने का दुस्साहस न कर सके।

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