दैनिक सांध्य बन्धु जबलपुर। मिलौनीगंज स्थित त्रिभुवन दास मालपाणी स्कूल के पीछे बने एक आवासीय बाड़े में देर रात उस वक्त हड़कंप मच गया, जब वहां खड़े करीब आधा दर्जन से अधिक दोपहिया वाहनों में अचानक भीषण आग लग गई। रात करीब 2 बजे लगी इस आग की तेज लपटों और धुएं के गुबार को देखकर इलाके में भगदड़ मच गई। लोग अपनी जान बचाने और राहत कार्य के लिए इधर-उधर भागने लगे।
संकरा रास्ता बना रुकावट
घटना की जानकारी तुरंत फायर ब्रिगेड और बिजली विभाग को दी गई। सूचना मिलते ही दमकल वाहन मौके के लिए रवाना हुए, लेकिन मिलौनीगंज का मुख्य मार्ग पार करने के बाद अंदरूनी रास्ता बेहद संकरा (महज 3 फीट चौड़ा) होने के कारण दमकल की गाड़ियां घटनास्थल तक नहीं पहुंच सकीं। दमकल कर्मी मुख्य सड़क पर ही खड़े रह गए।
करंट के डर से नहीं डाला पानी, डेढ़ घंटे बाद पहुंचा अमला
बाड़े में रहने वाले परिवारों ने बताया कि रात 2 बजे जब धुएं के कारण उनकी नींद खुली, तो उन्होंने कुलिया (गलियारे) में खड़े वाहनों को धधकते देखा। आसपास के लोग मदद के लिए दौड़े, लेकिन गाड़ियों के ठीक ऊपर बिजली के मीटर और खुले तार होने के कारण कोई भी पानी डालने की हिम्मत नहीं जुटा सका। सबको करंट लगने का डर था।
स्थानीय नागरिकों का आरोप है कि बिजली विभाग को तुरंत सूचना दी गई थी, लेकिन उनका अमला करीब डेढ़ घंटे की देरी से मौके पर पहुंचा। अगर बिजली कर्मचारी समय पर आकर लाइन काट देते, तो लोग खुद ही पानी डालकर आग बुझा लेते। जब तक बिजली कर्मचारियों ने आकर तार काटे, तब तक गाड़ियां करीब 80% तक जलकर खाक हो चुकी थीं। बाद में बिजली कटने पर पानी डालकर आग को पूरी तरह बुझाया गया।
शॉर्ट-सर्किट या साजिश?
आवासीय बाड़े में इस तरह अचानक आग लगने को लेकर क्षेत्र में तरह-तरह की चर्चाएं हैं। आमतौर पर पार्किंग में खड़े वाहनों में आग लगने के पीछे फ्यूल लीकेज, शॉर्ट-सर्किट या किसी जलती हुई सिगरेट को कारण माना जाता है। हालांकि, स्थानीय लोगों का ज्यादातर यही मानना है कि यह हादसा बिजली के तारों में हुए शॉर्ट-सर्किट की वजह से हुआ है। फिलहाल पुलिस और संबंधित विभाग मामले की जांच कर रहे हैं कि यह महज एक हादसा था या इसके पीछे किसी असामाजिक तत्व की करतूत है।
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