दैनिक सांध्य बन्धु (एजेंसी) नई दिल्ली। सोशल मीडिया पर चर्चित ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ (CJP) के संस्थापक अभिजीत दिपके ने 6 जून को भारत लौटने की घोषणा की है। उन्होंने अपने एक्स अकाउंट ‘कॉकरोच इज बैक’ के जरिए बताया कि भारत आने के बाद वे दिल्ली के जंतर-मंतर पर प्रदर्शन करेंगे और केंद्रीय शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग उठाएंगे।
हाल के दिनों में कॉकरोच जनता पार्टी सोशल मीडिया पर तेजी से लोकप्रिय हुई है। संगठन के इंस्टाग्राम अकाउंट पर 2 करोड़ से अधिक फॉलोअर्स हो चुके हैं। अभिजीत दिपके ने 16 मई को इस पहल की शुरुआत की थी, जिसे वे राजनीतिक और सामाजिक व्यंग्य (सटायर) पर आधारित अभियान बताते हैं।
महाराष्ट्र के संभाजीनगर निवासी 30 वर्षीय अभिजीत दिपके डिजिटल मीडिया स्ट्रैटेजिस्ट हैं। उन्होंने पुणे से पत्रकारिता की पढ़ाई की है और वर्तमान में अमेरिका की बोस्टन यूनिवर्सिटी में पब्लिक रिलेशंस में मास्टर्स कर रहे हैं। दिपके वर्ष 2020 से 2022 तक आम आदमी पार्टी की सोशल मीडिया टीम में कार्य कर चुके हैं और दिल्ली विधानसभा चुनाव के दौरान पार्टी के लिए डिजिटल प्रचार सामग्री तैयार करते थे।
इस बीच कॉकरोच जनता पार्टी का मूल एक्स अकाउंट 21 मई को ब्लॉक कर दिया गया था। केंद्र सरकार ने राष्ट्रीय सुरक्षा संबंधी चिंताओं का हवाला देते हुए सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम की धारा 69A के तहत कार्रवाई की थी। इसके बाद संगठन ने नया अकाउंट ‘कॉकरोच इज बैक’ नाम से शुरू किया, जिसके लाखों फॉलोअर्स हैं।
अकाउंट ब्लॉक किए जाने के खिलाफ अभिजीत दिपके ने दिल्ली हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। 29 मई को हुई सुनवाई में हाईकोर्ट ने तत्काल राहत देने से इनकार करते हुए केंद्र सरकार और एक्स से चार सप्ताह में जवाब मांगा है। मामले की अगली सुनवाई 6 जुलाई को होगी।
सुनवाई के दौरान दिपके की ओर से कहा गया कि यदि कुछ पोस्ट आपत्तिजनक हैं तो केवल उन पोस्ट पर कार्रवाई की जा सकती है, पूरे अकाउंट को बंद करना उचित नहीं है। वहीं केंद्र की ओर से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने तर्क दिया कि सरकार का पक्ष सुने बिना कोई आदेश पारित नहीं किया जाना चाहिए और आवश्यकता पड़ने पर पूरा रिकॉर्ड अदालत के समक्ष प्रस्तुत किया जा सकता है।
उधर, कॉकरोच जनता पार्टी से जुड़े लोगों की गतिविधियों की सीबीआई जांच की मांग वाली याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने तत्काल सुनवाई से इनकार कर दिया। सुनवाई के दौरान अदालत ने टिप्पणी की कि इस मामले को अत्यधिक भावुकता से नहीं लिया जाना चाहिए।
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