दैनिक सांध्य बन्धु (एजेंसी) नई दिल्ली। केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) में ऑन स्क्रीन मार्किंग (OSM) प्रणाली को लेकर उपजे भारी विवाद के बाद केंद्र सरकार ने मंगलवार को एक बड़ा प्रशासनिक कदम उठाया है। सरकार ने तत्काल प्रभाव से CBSE के चेयरमैन राहुल सिंह और सचिव हिमांशु गुप्ता का ट्रांसफर कर दिया है। इसके साथ ही, ऑन स्क्रीन मार्किंग सर्विस की पूरी टेंडर प्रक्रिया और खरीद प्रक्रिया की जांच के लिए एक सदस्यीय विशेष कमेटी का गठन कर दिया है। इसी बीच, एक तरफ जहां बोर्ड के री-इवैल्यूएशन (पुनर्मूल्यांकन) पोर्टल पर एक बड़ा साइबर अटैक हुआ, वहीं दूसरी तरफ इस पूरी गड़बड़ी का खुलासा करने वाले 12वीं के छात्र सार्थक सिद्धांत मंगलवार को संसद की स्थायी समिति के सामने पेश हुए। संसदीय इतिहास में यह पहला मौका है जब किसी छात्र को किसी गंभीर मामले में अपना पक्ष और तकनीकी प्रेजेंटेशन देने के लिए विशेष रूप से आमंत्रित किया गया।
संसद भवन एनेक्सी में शिक्षा, महिला, बाल, युवा और खेल मामलों की संसदीय स्थायी समिति की बैठक में रांची के 17 वर्षीय टेक रिसर्चर और छात्र सार्थक सिद्धांत ने हिस्सा लिया। उन्होंने समिति के अध्यक्ष दिग्विजय सिंह व अन्य सदस्यों के सामने प्रेजेंटेशन देते हुए बताया कि उनके तकनीकी विश्लेषण और ब्लॉग के अनुसार इस पूरी डिजिटल मूल्यांकन प्रणाली में कम से कम 15 गंभीर खामियां हैं। सार्थक ने एक खोजी पत्रकार और डेटा साइंटिस्ट की तरह काम करते हुए सीबीएसई द्वारा जारी पिछले 576 दस्तावेजों का बारीकी से अध्ययन कर टेंडर प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं को उजागर किया है। सार्थक के साथ ही दिल्ली के एक अन्य छात्र वेदांत श्रीवास्तव ने भी फिजिक्स के पेपर में गड़बड़ी के खिलाफ आवाज उठाई थी, जिसके बाद बोर्ड को अपनी गलती माननी पड़ी थी। छात्र के इन दावों के बाद अब शिक्षा मंत्रालय ने 'कोएम्प्ट' (COEMPT) कंपनी को दिए गए टेंडर को लेकर बोर्ड से विस्तृत रिपोर्ट तलब की है। गौरतलब है कि हैदराबाद की इस कंपनी पर साल 2019 में तेलंगाना बोर्ड परीक्षा के दौरान भी डेटा प्रोसेसिंग में बड़ी लापरवाही के आरोप लगे थे, जिसके कारण 3 लाख से ज्यादा छात्र फेल हो गए थे।
इस बड़े सियासी और प्रशासनिक घमासान के बीच, मंगलवार को ही सीबीएसई के री-इवैल्यूएशन पोर्टल पर एक बड़ा साइबर हमला हुआ। बोर्ड से मिली जानकारी के अनुसार, महज 2 मिनट के भीतर पोर्टल पर 15 लाख बार एक्सेस करने की कोशिश की गई, जबकि 1 लाख से अधिक बार सिस्टम की गोपनीय फाइलों तक बिना अनुमति के पहुंचने का प्रयास (अनधिकृत एक्सेस) किया गया। हालांकि, इस तकनीकी हमले के बावजूद सुरक्षा घेरा मजबूत होने के कारण पोर्टल सुचारू रूप से काम करता रहा और मंगलवार दोपहर 3:00 बजे तक ही 16 हजार से ज्यादा प्रभावित छात्रों ने री-इवैल्यूएशन के लिए अपना ऑनलाइन आवेदन दर्ज करा दिया। ज्ञात हो कि 13 मई को 12वीं का रिजल्ट जारी होने के बाद से ही कॉपियों के डिजिटल मूल्यांकन को लेकर देश भर में छात्रों का गुस्सा फूट रहा था, जिसके बाद 19 मई को शिकायत पोर्टल क्रैश होने और आईआईटी से मदद लेने जैसे कई घटनाक्रमों के बाद अब यह मामला सरकार और संसद के शीर्ष स्तर तक पहुंच गया है।
