दैनिक सांध्य बन्धु (एजेंसी) नई दिल्ली। चुनाव आयोग ने मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश, बिहार और राजस्थान समेत 17 राज्यों एवं केंद्रशासित प्रदेशों में मतदाता सूची के स्पेशल समरी रिवीजन (SSR) की प्रक्रिया शुरू करने के निर्देश दिए हैं। इस संबंध में आयोग ने संबंधित राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों के मुख्य निर्वाचन अधिकारियों को पत्र भेजा है। इस प्रक्रिया के तहत मतदाता सूची में नए नाम जोड़े जाएंगे और पहले से दर्ज जानकारी में गलतियों को सुधारा जाएगा।
यह निर्देश ऐसे समय में आया है, जब मतदाता सूची के स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) को लेकर राजनीतिक विवाद और विरोध देखने को मिल रहा है। आयोग की SSR प्रक्रिया का उद्देश्य मतदाता सूची को अद्यतन रखना और यह सुनिश्चित करना है कि कोई भी पात्र नागरिक मतदाता सूची में नाम दर्ज कराने से वंचित न रहे।
युवाओं और पहली बार वोट देने वालों पर रहेगा फोकस
चुनाव आयोग के निर्देशों के अनुसार, मतदाता सूची को अपडेट करने के दौरान युवाओं और पहली बार मतदान करने वाले नागरिकों पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। वर्ष 2027 में 18 वर्ष की आयु पूरी करने वाले युवा भी मतदाता सूची में नाम दर्ज कराने के लिए आवेदन कर सकेंगे।
1 जनवरी 2027 के अलावा 1 अप्रैल, 1 जुलाई और 1 अक्टूबर 2027 को 18 वर्ष की आयु पूरी करने वाले युवा भी अग्रिम रूप से आवेदन कर सकते हैं। आयोग ने अधिकारियों को निर्देश दिया है कि सभी पात्र नागरिकों को आवेदन करने का अवसर उपलब्ध कराया जाए, ताकि कोई भी योग्य मतदाता सूची से बाहर न रहे।
SSR के आदेश में SIR के दौरान छूटे नामों के लिए अलग प्रक्रिया का उल्लेख नहीं
चुनाव आयोग के SSR संबंधी आदेश में SIR के दौरान मतदाता सूची में नाम शामिल नहीं हो पाने वाले लोगों के लिए किसी अलग प्रक्रिया का स्पष्ट उल्लेख नहीं किया गया है।
हालांकि, SIR के दौरान जारी मसौदा मतदाता सूची में नाम नहीं होने की स्थिति में संबंधित व्यक्ति फॉर्म-6 भरकर नाम जुड़वाने के लिए आवेदन कर सकता है। इसके साथ आवश्यक दस्तावेज भी प्रस्तुत करने होंगे। आवेदन जमा करने मात्र से नाम मतदाता सूची में शामिल नहीं हो जाएगा। निर्वाचन पंजीकरण अधिकारी (ERO) पात्रता की जांच करने के बाद ही नाम जोड़ने पर निर्णय लेंगे।
मतदान केंद्रों की संख्या और स्थानों की भी होगी समीक्षा
मतदाता सूची के पुनरीक्षण के साथ-साथ चुनाव आयोग ने मतदान केंद्रों की संख्या और उनके स्थानों की समीक्षा करने के निर्देश भी दिए हैं। आयोग के अनुसार, सामान्य तौर पर एक मतदान केंद्र पर 1,200 से अधिक मतदाता नहीं होने चाहिए।
मतदाताओं को मतदान केंद्र तक पहुंचने में परेशानी न हो, इसके लिए यह भी सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं कि उन्हें सामान्य परिस्थितियों में दो किलोमीटर से अधिक दूरी तय न करनी पड़े। इस उद्देश्य से बहुमंजिला इमारतों, रिहायशी कॉलोनियों और शहरी झुग्गी-बस्तियों का सर्वे किया जाएगा।
यदि नए मतदान केंद्र की आवश्यकता होती है, तो जिला निर्वाचन अधिकारी प्रस्ताव भेजेंगे। मौजूदा और प्रस्तावित मतदान केंद्रों के स्थानों का भौतिक सत्यापन भी किया जाएगा। नया मतदान केंद्र स्थापित करने के लिए आयोग की मंजूरी आवश्यक होगी।
अधिकारियों के पद खाली नहीं रखने के निर्देश
चुनाव आयोग ने राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों के मुख्य सचिवों को निर्देश दिया है कि मतदाता सूची पुनरीक्षण के दौरान निर्वाचन अधिकारियों को पर्याप्त कर्मचारी और संसाधन उपलब्ध कराए जाएं।
मुख्य निर्वाचन अधिकारी (CEO), जिला निर्वाचन अधिकारी (DEO), निर्वाचक पंजीकरण अधिकारी (ERO) और सहायक निर्वाचक पंजीकरण अधिकारी (AERO) के पद खाली नहीं रहने चाहिए। आयोग की मंजूरी के बिना इन अधिकारियों का तबादला भी नहीं किया जा सकेगा। यदि किसी अधिकारी का तबादला जरूरी हो, तो इसके लिए उचित कारणों सहित प्रस्ताव आयोग को भेजना होगा।
जनप्रतिनिधित्व अधिनियम, 1950 की धारा 13CC के तहत मतदाता सूची तैयार करने, उसमें संशोधन करने और गलतियां सुधारने के कार्य में लगे अधिकारी इस अवधि में चुनाव आयोग के नियंत्रण और निगरानी में काम करेंगे।
मतदाताओं के पते एक समान प्रारूप में दर्ज होंगे
मतदाता सूची में दर्ज पतों को व्यवस्थित और एक समान प्रारूप में दर्ज करने के निर्देश भी दिए गए हैं। इसका उद्देश्य मतदाताओं के घर और उनके संबंधित मतदान क्षेत्र की पहचान आसान बनाना है। इससे मतदाता सूची में दर्ज जानकारी को अधिक व्यवस्थित करने और मतदान केंद्रों की पहचान में मदद मिलने की उम्मीद है।
उत्तर प्रदेश समेत पांच राज्यों में 2027 में विधानसभा चुनाव
वर्ष 2027 में उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, पंजाब, गोवा और मणिपुर में विधानसभा चुनाव प्रस्तावित हैं। इन पांचों राज्यों में SSR कराया जाएगा। उत्तर प्रदेश विधानसभा का कार्यकाल 22 मई 2027 को समाप्त होगा, जबकि गोवा, मणिपुर, पंजाब और उत्तराखंड की विधानसभाओं का कार्यकाल मार्च 2027 में अलग-अलग तारीखों पर समाप्त होगा।
आयोग के निर्देशों के अनुसार, अन्य राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों में भी मतदाता सूची पुनरीक्षण की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जाएगी। हालांकि, संबंधित क्षेत्रों के लिए विस्तृत कार्यक्रम बाद में घोषित किया जाएगा।
इन राज्यों में बाद में घोषित होगा SSR का कार्यक्रम
आंध्र प्रदेश, अरुणाचल प्रदेश, चंडीगढ़, दादरा और नगर हवेली, दमन और दीव, हरियाणा, झारखंड, कर्नाटक, महाराष्ट्र, मेघालय, मिजोरम, नगालैंड, दिल्ली, ओडिशा, सिक्किम, त्रिपुरा और तेलंगाना में SSR का कार्यक्रम बाद में घोषित किया जाएगा। वहीं, हिमाचल प्रदेश, जम्मू-कश्मीर और लद्दाख में मौसम संबंधी परिस्थितियों को देखते हुए कार्यक्रम बाद में जारी किया जाएगा।
पांच बिंदुओं में समझिए SSR और SIR का अंतर
1. SSR का उद्देश्य: नियमित रूप से मतदाता सूची को अपडेट करना, नए पात्र मतदाताओं के नाम जोड़ना और दर्ज जानकारी में गलतियां सुधारना।
2. SIR का उद्देश्य: मतदाता सूची का विशेष गहन पुनरीक्षण करना, जिसमें निर्धारित प्रक्रिया के तहत मतदाताओं की पात्रता और सूची में उनकी प्रविष्टियों की जांच की जाती है।
3. प्रक्रिया का दायरा: SSR में सूची को अद्यतन करने और सुधारने पर जोर रहता है, जबकि SIR में अधिक व्यापक स्तर पर गहन सत्यापन किया जाता है।
4. नए मतदाताओं के लिए अवसर: SSR के तहत 18 वर्ष की आयु पूरी करने वाले पात्र युवा निर्धारित तिथियों के अनुसार अग्रिम आवेदन कर सकते हैं। SIR के दौरान भी नाम छूटने की स्थिति में लागू नियमों के तहत आवेदन किया जा सकता है।
5. नाम जोड़ने की प्रक्रिया: दोनों ही प्रक्रियाओं में नाम जोड़ने के लिए निर्धारित आवेदन और पात्रता संबंधी नियमों का पालन करना जरूरी है। केवल आवेदन करने से नाम अपने आप मतदाता सूची में शामिल नहीं होता।
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