दैनिक सांध्य बन्धु (एजेंसी) मुंबई। धनतेरस से एक दिन पहले गुरुवार को भारतीय शेयर बाजार में जबरदस्त तेजी देखने को मिली। सेंसेक्स करीब 2,000 अंक यानी 2.60 प्रतिशत उछलकर 79,300 के स्तर पर पहुंच गया, जबकि निफ्टी में 550 अंक यानी 2.40 प्रतिशत की बढ़त दर्ज की गई और यह 24,500 के पार कारोबार करने लगा। बाजार में आई इस तेजी से निवेशकों की संपत्ति में 8 लाख करोड़ रुपये से अधिक का इजाफा हुआ।
इस साल सेंसेक्स की यह दूसरी सबसे बड़ी तेजी बताई जा रही है। इससे पहले 8 अप्रैल को सेंसेक्स में 2,946 अंकों की बढ़त दर्ज की गई थी। करीब सात महीने बाद बाजार में इतनी बड़ी तेजी देखने को मिली है। निफ्टी ने भी 4 सितंबर के बाद पहली बार 24 हजार का स्तर पार किया।
शेयर बाजार में लगातार छठे कारोबारी दिन तेजी का सिलसिला जारी रहा। 28 अक्टूबर को सेंसेक्स 73,246 के स्तर पर था, जो 5 नवंबर तक बढ़कर 79 हजार के आसपास पहुंच गया। बाजार में तेजी के पीछे वैश्विक राजनीतिक घटनाक्रम, कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट, कंपनियों के बेहतर तिमाही नतीजे और डॉलर में कमजोरी की उम्मीद को प्रमुख वजह माना जा रहा है।
अमेरिका में मिडटर्म चुनाव के नतीजों में राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प की पार्टी को दोनों सदनों में हार मिलने की खबरों ने वैश्विक बाजारों में हलचल पैदा की। इससे अंतरराष्ट्रीय तनाव कम होने और ईरान से जुड़े संघर्ष के थमने की उम्मीदों को बल मिला। हालांकि, ऐसे राजनीतिक घटनाक्रमों का बाजार पर असर निवेशकों की उम्मीदों और आगे के घटनाक्रम पर निर्भर करेगा।
कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट भी भारतीय बाजार के लिए राहत की खबर मानी जा रही है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में ब्रेंट क्रूड करीब 94 डॉलर और अमेरिकी WTI क्रूड करीब 87 डॉलर प्रति बैरल पर आ गया। भारत अपनी जरूरत का 80 प्रतिशत से अधिक कच्चा तेल आयात करता है। ऐसे में तेल की कीमतें कम होने से देश का आयात बिल घट सकता है और अर्थव्यवस्था को फायदा मिल सकता है।
इसके अलावा सितंबर तिमाही में कई बड़ी कंपनियों के बेहतर वित्तीय नतीजों से निवेशकों का भरोसा मजबूत हुआ है। रिलायंस, इंफोसिस और टीसीएस जैसी कंपनियों के शेयरों में तेजी ने बाजार को सहारा दिया। सेंसेक्स की प्रमुख कंपनियों के शेयरों में खरीदारी बढ़ने से सूचकांक में जोरदार उछाल आया।
डॉलर में कमजोरी की उम्मीद को भी बाजार में तेजी का एक कारण माना जा रहा है। डॉलर कमजोर होने पर भारत जैसे उभरते बाजार विदेशी निवेशकों के लिए आकर्षक बन सकते हैं। इससे विदेशी संस्थागत निवेशकों (FII) की खरीदारी बढ़ने की संभावना रहती है।
एशियाई बाजारों में हालांकि मिला-जुला रुख देखने को मिला। दक्षिण कोरिया का कोस्पी 5.28 प्रतिशत गिरकर 5,384 के स्तर पर आ गया, जबकि जापान का निक्केई 1.79 प्रतिशत टूटकर 61,078 पर रहा। इसके विपरीत हॉन्गकॉन्ग का हैंगसेंग 3.67 प्रतिशत की तेजी के साथ 24,797 के स्तर पर पहुंच गया।
जियोजित इन्वेस्टमेंट्स के डॉ. वीके विजयकुमार के मुताबिक, कंपनियों के बेहतर नतीजे, कच्चे तेल की कम कीमतें और लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन (LTCG) टैक्स में संभावित बदलाव की उम्मीद से बाजार का माहौल सुधरा है। उनके अनुसार, विदेशी निवेशकों की शुरुआती खरीदारी से लार्जकैप शेयरों में तेजी आई है। बैंकिंग और फाइनेंशियल सेक्टर के बड़े शेयरों में आगे भी रिकवरी की संभावना बनी हुई है।
हालांकि, बाजार विशेषज्ञों ने ऊंचे स्तरों पर सावधानी बरतने की सलाह भी दी है। बाजार में तेजी जारी रहने पर घरेलू निवेशक मुनाफावसूली कर सकते हैं, जिससे ऊपरी स्तरों पर बिकवाली का दबाव बन सकता है। ऐसे में निवेशकों के लिए बाजार की तेजी के बीच सोच-समझकर फैसले लेना जरूरी है।
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