दैनिक सांध्य बन्धु (एजेंसी) रामपुर। समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता आजम खान करीब 11 महीने बाद शनिवार, 31 अक्टूबर को रामपुर जिला जेल से बाहर आए, लेकिन उनकी रिहाई ज्यादा देर नहीं टिक सकी। जेल के मुख्य द्वार पर मौजूद प्रवर्तन निदेशालय (ED) की टीम ने पहले उनसे पूछताछ की और फिर उन्हें अपने साथ ले गई। ईडी उन्हें गाजियाबाद स्थित विशेष पीएमएलए अदालत में पेश करने की तैयारी में है।
जेल से बाहर आने के बाद आजम खान ने भावुक अंदाज में कहा, “अब कहने को क्या है? यह मुसलमान होने की सजा है। गलती यह है कि एक मुसलमान ने यूनिवर्सिटी बनाई। यह हमारा गुनाह है।” इस दौरान उन्होंने आसमान की ओर हाथ उठाकर इशारा भी किया। जेल के बाहर उनके समर्थकों की भारी भीड़ जुटी थी।
जौहर यूनिवर्सिटी के निर्माण में वित्तीय अनियमितताओं की जांच
ईडी का आरोप है कि जौहर यूनिवर्सिटी के निर्माण में सरकारी धन और ठेकों से जुड़े पैसों के इस्तेमाल में अनियमितताएं हुईं। एजेंसी करीब 416.14 करोड़ रुपये के खर्च और कथित मनी लॉन्ड्रिंग की जांच कर रही है। जौहर ट्रस्ट और यूनिवर्सिटी से जुड़े वित्तीय लेन-देन भी जांच के दायरे में हैं।
रिपोर्ट के मुताबिक, ईडी की टीम आजम खान की रिहाई से करीब 15 मिनट पहले जेल परिसर में दाखिल हुई थी। जेल के बाहर केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (CRPF) के करीब 24 जवान तैनात थे। कार्रवाई के दौरान ईडी अधिकारियों और आजम खान के वकीलों के बीच बहस भी हुई।
आजम के वकील जुबेर खान ने आरोप लगाया कि कुछ अधिकारी पहचान पत्र दिखाए बिना जेल में दाखिल हुए। उन्होंने यह भी कहा कि आजम खान की तबीयत ठीक नहीं होने की जानकारी अधिकारियों को दी गई थी, लेकिन उनकी बात नहीं सुनी गई। ये आरोप वकील की ओर से लगाए गए हैं।
बेटे अब्दुल्ला आजम घर पहुंचे
आजम खान अपने बेटे अब्दुल्ला आजम के साथ जेल से बाहर निकले थे। ईडी की कार्रवाई के बाद अधिकारियों ने आजम को अपने वाहन में बैठा लिया, जबकि अब्दुल्ला समर्थकों के साथ घर रवाना हो गए। जेल के बाहर मौजूद समर्थकों ने नारेबाजी की और रिहाई की खुशी जताई थी।
आजम खान और अब्दुल्ला आजम 17 नवंबर 2025 से रामपुर जेल में बंद थे। दोनों को दो पैन कार्ड से जुड़े मामले में सजा सुनाई गई थी। बाद में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने 29 अक्टूबर 2026 को दोनों की सजा निलंबित करते हुए जमानत दे दी थी। इसी आदेश के बाद उनकी जेल से रिहाई का रास्ता खुला था।
अखिलेश यादव ने उठाए कार्रवाई पर सवाल
आजम खान की गिरफ्तारी पर समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने कहा कि आजम खान के खिलाफ मुकदमों के जरिए जो साजिश की जा रही है, उसे पूरा देश ही नहीं, पूरी दुनिया देख रही है। उन्होंने कार्रवाई को निंदनीय बताते हुए कहा कि सत्ता में रहते हुए गलत परंपराओं को बढ़ावा देने वालों को भविष्य में इसका सामना करना पड़ सकता है।
सपा विधायक रविदास मेहरोत्रा ने भी आरोप लगाया कि भाजपा सरकार विपक्षी नेताओं के खिलाफ केंद्रीय जांच एजेंसियों का इस्तेमाल कर रही है। हालांकि, ये राजनीतिक आरोप हैं। ईडी की कार्रवाई जौहर यूनिवर्सिटी से जुड़े कथित वित्तीय अनियमितताओं की जांच के तहत की गई है।
आजम खान पर 105 मामले दर्ज
जानकारी के अनुसार, आजम खान के खिलाफ कुल 105 मामले दर्ज हैं, जिनमें से 94 मामले रामपुर में दर्ज बताए गए हैं। इनमें राजस्व से जुड़े मामले भी शामिल हैं। जौहर ट्रस्ट और यूनिवर्सिटी के अलावा उत्तर प्रदेश राज्य हज समिति की जमीन की बिक्री से जुड़े कथित अनियमितताओं के मामले में भी उनका नाम सामने आया है। हज समिति की जमीन की बिक्री से करीब 2.08 करोड़ रुपये के राजस्व नुकसान का आरोप है।
ईडी की गिरफ्तारी के बाद अब आजम खान को अदालत में पेश किए जाने और आगे की हिरासत या जमानत से जुड़ी कानूनी प्रक्रिया पर नजर रहेगी। अदालत ही तय करेगी कि जांच के लिए उन्हें ईडी की हिरासत में दिया जाएगा या नहीं।
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