MP भाजयुमो की नियुक्तियों पर बवाल: बालाघाट में जिलाध्यक्ष की भाभी पहुंचीं थाने, मंडला में दहेज प्रताड़ना का केस; नर्मदापुरम में निष्कासित नेता को मिली कमान

दैनिक सांध्य बन्धु (एजेंसी) भोपाल। मध्यप्रदेश में भारतीय जनता युवा मोर्चा (भाजयुमो) के 19 जिलों में अध्यक्षों और महामंत्रियों की नियुक्तियों के बाद विवाद गहराता नजर आ रहा है। 29 अक्टूबर को प्रदेश अध्यक्ष श्याम टेलर द्वारा नियुक्तियों की घोषणा किए जाने के बाद कई जिलों में चयन प्रक्रिया, पदाधिकारियों की पृष्ठभूमि और संगठनात्मक फैसलों को लेकर सवाल उठने लगे हैं। बालाघाट में नवनियुक्त जिलाध्यक्ष के परिवार से जुड़ा विवाद थाने तक पहुंच गया, वहीं मंडला में जिलाध्यक्ष की पत्नी की शिकायत पर दर्ज दहेज प्रताड़ना के मामले और नर्मदापुरम में पूर्व में निष्कासित रहे नेता को जिम्मेदारी दिए जाने को लेकर चर्चा तेज है।

बालाघाट: जिलाध्यक्ष की भाभी ने थाने में की शिकायत

बालाघाट में अमन गांधी को भाजयुमो जिलाध्यक्ष बनाए जाने के बाद पारिवारिक विवाद सामने आया है। उनकी भाभी पूजा गांधी ने 30 अक्टूबर को कोतवाली थाने में शिकायत दर्ज कराते हुए मारपीट और जान से मारने की धमकी देने के आरोप लगाए हैं।

शिकायत के मुताबिक, अमन गांधी, उनके ससुर और परिवार के अन्य सदस्यों पर शराब के नशे में उनके और उनके पति के साथ मारपीट करने का आरोप है। पूजा गांधी ने अपने, पति और छह वर्षीय बच्चे की सुरक्षा की मांग भी की है। बताया गया है कि इसी परिवार के खिलाफ अगस्त में भी शिकायत दर्ज हुई थी। मामले में लगाए गए आरोपों की जांच और पुलिस की कार्रवाई की स्थिति अलग से स्पष्ट होना बाकी है।

मंडला: जिलाध्यक्ष की नियुक्ति के बीच दहेज प्रताड़ना का मामला चर्चा में

मंडला में उत्कर्ष यादव को भाजयुमो जिलाध्यक्ष बनाए जाने के बाद उनके खिलाफ दर्ज दहेज प्रताड़ना के मामले को लेकर सवाल उठ रहे हैं। जानकारी के मुताबिक, जून 2026 में लखनादौन थाने में उत्कर्ष यादव और उनके परिवार के तीन सदस्यों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता की धारा 85 तथा दहेज प्रतिषेध अधिनियम की धाराओं 3 और 4 के तहत मामला दर्ज किया गया था।

शिकायत में उनकी पत्नी ने आरोप लगाया था कि विवाह के बाद ससुराल पक्ष की ओर से थार गाड़ी की मांग की जाने लगी। नियुक्ति के बाद यह मामला फिर चर्चा में आ गया है। हालांकि, प्राथमिकी में दर्ज आरोपों को न्यायिक रूप से सिद्ध तथ्य नहीं माना जा सकता।

नर्मदापुरम: छह साल के निष्कासन के बाद जिलाध्यक्ष की जिम्मेदारी

नर्मदापुरम में कुलदीप रघुवंशी को भाजयुमो जिलाध्यक्ष बनाए जाने पर संगठन के भीतर पुराने घटनाक्रम को लेकर चर्चा हो रही है। बताया जाता है कि वर्ष 2023 में इटारसी नगर मंडल अध्यक्ष की नियुक्ति को लेकर हुए विवाद के दौरान मारपीट का मामला सामने आया था। इसके बाद तत्कालीन जिला अध्यक्ष माधवदास अग्रवाल ने कुलदीप रघुवंशी को छह साल के लिए पार्टी से निष्कासित कर दिया था। निष्कासन की अवधि वर्ष 2029 तक बताई गई थी।

अब उन्हें जिलाध्यक्ष की जिम्मेदारी दिए जाने पर सवाल उठ रहे हैं। हालांकि, कुलदीप रघुवंशी का कहना है कि एक घटना में उनका नाम जुड़वा दिया गया था और करीब डेढ़ महीने में ही वह दोषमुक्त हो गए थे। उनके मुताबिक, इसके बाद पार्टी में उनकी वापसी हो गई थी।

सिवनी: नियुक्ति प्रक्रिया और तैयार पैनल पर उठे सवाल

सिवनी में योगेश शिवहरे को जिलाध्यक्ष बनाए जाने के बाद चयन प्रक्रिया को लेकर नाराजगी सामने आई है। आरोप है कि जिला स्तर पर कोर ग्रुप की सहमति से तैयार किए गए पैनल को दरकिनार कर नियुक्ति की गई। पैनल में नाम नहीं होने के बावजूद जिम्मेदारी मिलने की चर्चा के बाद कुछ युवा नेताओं ने आपत्ति जताई है। इससे प्रदेश संगठन के फैसले पर भी सवाल उठने लगे हैं।

इंदौर ग्रामीण: लगातार तीसरी बार एक ही समाज को प्रतिनिधित्व देने पर आपत्ति

इंदौर ग्रामीण में अजय सिंह पंवार को जिलाध्यक्ष बनाए जाने के बाद सामाजिक प्रतिनिधित्व को लेकर विवाद सामने आया है। कुछ नेताओं ने राजपूत समाज से लगातार तीसरी बार अध्यक्ष बनाए जाने पर आपत्ति जताई है। इसके अलावा दावेदारों की उम्र और क्षेत्रीय प्रतिनिधित्व को लेकर भी शिकायतें सामने आने की बात कही गई है। सांवेर, महू, राऊ और बेटमा क्षेत्र के नेताओं ने भी अपनी दावेदारी पेश की थी।

सागर: जिलाध्यक्ष की नियुक्ति के साथ पुरानी आयकर कार्रवाई की चर्चा

सागर में भाजयुमो जिलाध्यक्ष बनाए गए जसवंत राठौर की नियुक्ति के बाद उनके परिवार से जुड़ी पुरानी आयकर विभाग की कार्रवाई भी चर्चा में है। बताया गया है कि 5 जनवरी 2025 को आयकर विभाग ने पूर्व भाजपा विधायक हरवंश सिंह राठौर के आवास सहित तीन ठिकानों पर छापेमारी की थी। यह कार्रवाई बीड़ी कारोबार, संपत्तियों और वित्तीय लेन-देन की जांच से संबंधित थी। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, इस कार्रवाई में जसवंत राठौर के खिलाफ सीधे तौर पर कार्रवाई होने की बात सामने नहीं आई है।

नियुक्तियों से संगठन के भीतर बढ़ी हलचल

भाजयुमो की नई नियुक्तियों के बाद अलग-अलग जिलों में उठे विवादों ने संगठन की चयन प्रक्रिया और पदाधिकारियों के चयन के मानकों पर बहस तेज कर दी है। कहीं पारिवारिक विवाद और दर्ज मामलों को लेकर सवाल हैं, तो कहीं पुराने निष्कासन, सामाजिक प्रतिनिधित्व और पैनल की अनदेखी के आरोप सामने आए हैं। अब इन मुद्दों पर प्रदेश संगठन का क्या रुख रहता है और नाराज नेताओं की शिकायतों पर क्या कदम उठाए जाते हैं, इस पर नजर रहेगी।

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