(जबलपुर) : असत्य पर सत्य की जीत के महापर्व दशहरा की पूरे देश में धूम हैं। मध्यप्रदेश के जबलपुर में विजयदशमी की अनूठी छटा देखने को मिलती है। एक दिन पहले यहां ऐतिहासिक पंजाबी दशहरा मनाने की 71 सालों से परंपरा निभाई जा रही है। इस बार 61 फीट ऊंचे अहंकार के विशालकाय रावण का दहन हुआ,तो आसमान आतिशबाजी से रंगीन हो गया। पंजाबी वेशभूषा में आकर्षक नृत्य और इंटरनेशनल श्याम बैंड के 200 कलाकारों की प्रस्तुतियों ने लोगों का खूब मन मोहा..विजयदशमी पर्व की देश भर में धूम मची है। अन्याय पर न्याय की विजय प्रतीक इस पर्व को अलग-अलग अंदाज में मनाने की परंपराए हैं। मध्यप्रदेश के जबलपुर में एक दिन पहले पंजाबी दशहरा मनाया जाता है। इस बार भी इस ऐतिहासिक दशहरा ने सनातन धर्म संस्कृति के अनूठे रंग बिखेरे। सामाजिक बुराइयों का संदेश देते विशालकाय रावण, मेघनाथ और कुम्भकर्ण के पुतले खड़े थे। प्रतीकात्मक स्वरुप भगवान श्रीराम ने जैसे ही तीर छोड़ते ही महज 20 सेकंड में अहंकारी रावण धूं-धूंकर जल उठा..नवरात्री के नवमी के दिन जबलपुर के पंजाबी हिन्दू एसोशिएसन द्वारा आयोजित इस भव्य दशहरा में रावण का कद हर साल बढ़ जाता है। इस बार 61 फीट ऊंचा रावण का पुतला दहन के लिए तैयार किया गया था। वही मेघनाथ और कुम्भकर्ण की ऊंचाई 55 फीट रखी गई थी। नर्मदा तट ग्वारीघाट के नजदीक आयुर्वेदिक कॉलेज ग्राउंड में खड़े ये विशालकाय पुतले अपने अहंकारी चरित्र को दर्शा रहे थे..ख़ासबात यह है कि हिन्दू धर्म के इस त्यौहार के इस आयोजन के लिए रावण, मेघनाथ, कुम्भकर्ण के पुतलों को मुस्लिम कारीगर बनाते हैं। इसका निर्माण करने वाले कारीगर मो. इफतीखार आलम की चार पीढ़ियां यह काम करते आ रही हैं..पंजाबी दशहरे के लिए तैयार किए गए ये पुतले अंबाला डिजाइन के है। अकेले जबलपुर के लिए ये कारीगर 15 से ज्यादा रावण के पुतलों का निर्माण करते है। सबसे ऊंचा 90 फीट का रावण 1992 में बनाया था...पंजाबी दशहरा सांप्रदायिक सदभावना की भी झलक कुछ इस तरह देखने मिलती है रावण और कुम्भकरण का पुतला बनाने वाले मो.इफतीखार है से इस कला को सीखने वाले एमपी के अलावा दूसरे राज्यों में ऐसे पुतले बनाने जाते है..इस के साथ ही लोगो के संगीत की धुन से समा बांधने के लिए महशूर इंटरनेशनल श्याम बैंड के 200 कलाकारों की टीम की प्रस्तुति ने आयोजन की खूबसूरती में चार चाँद लगा दिए। बैंड धुनों पर दुलदुल घोड़ी का नृत्य हो या फिर अन्य प्रस्तुति कलाकार थिरकते नजर आए। जिसका मौजूद लोगों ने जमकर लुत्फ़ उठाया..विशालकाय रावण के अलावा आयोजन में विशेष आकर्षण का केंद्र यहां की आतिशबाजी रहती है। प्रसिद्द शिवाकाशी और अन्य आतिशबाजों ने एक से बढ़कर एक आतिशबाजी का प्रदर्शन किया। जुगनू से लेकर ताजमहल तक के अनोखे आतिशबाजी के आइटम की प्रस्तुतियां देख लोग हैरान रह गए। इस बार हाई स्पीड 440, किंग आफ किंग, सिजनिंग सालसा. पोओ गोल्ड, स्काई स्क्रेपर्स ब्लू बरियर्स,टाइटेनियम ट्री कलर फलसन,वर्ल्ड बंडर जब चलाए गए तो जमीन से लेकर आसमान रंग बिरंगी रोशनी से नहा गया..
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