दैनिक सांध्य बन्धु जबलपुर। 108 मुनि विरंजन सागर मुनिराज ने जबलपुर में अपने प्रवचनों के दौरान श्रावकों को यह संदेश दिया कि हमें हमेशा गुणों पर ध्यान देना चाहिए, न कि दोषों पर। जैन शास्त्रों का हवाला देते हुए उन्होंने कहा कि हमें उन गुणीजनों का आभार मानना चाहिए जिन्होंने हमें एक अक्षर का भी ज्ञान दिया है।
उन्होंने कहा कि गुरु हमें सद्मार्ग की ओर ले जाते हैं और हमारे जीवन को दिशा देते हैं। भारतीय संस्कृति में गुरु का स्थान बहुत ऊँचा होता है, और हमें उनके प्रति सेवा और आदर का भाव रखना चाहिए। मुनिराज ने विशेष रूप से बच्चों को अपने माता-पिता और गुरुओं का सम्मान करने के लिए प्रेरित किया।
मुनिराज ने यह भी कहा कि हमारे देश की संस्कृति और संस्कार अद्वितीय हैं, लेकिन हम दोषों पर अधिक ध्यान देने की प्रवृत्ति के कारण पिछड़ जाते हैं। अगर हम दोषों की बजाय गुणों पर ध्यान केंद्रित करें, तो हमारा देश विश्व में सर्वोच्च स्थान प्राप्त कर सकता है।
प्रवचन के अंत में, मुनिराज ने सभी श्रावकों और बच्चों से रोजाना 10 से 15 मिनट स्वाध्याय करने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि स्वाध्याय से न केवल धर्मशास्त्र के ज्ञान में वृद्धि होगी, बल्कि यह आपको विज्ञान और अन्य विषयों में भी प्रगति करने में मदद करेगा। "जो पढ़ता है, वही बढ़ता है," मुनिराज ने जोर देकर कहा।
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