दैनिक सांध्य बन्धु जबलपुर। रानी दुर्गावती विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपति प्रोफेसर कपिल देव मिश्र के आठ साल के कार्यकाल की जांच करने आई उच्च शिक्षा विभाग की टीम, अपने साथ जांच दस्तावेज लेकर लौट गई है, लेकिन इस जांच के बाद कई महत्वपूर्ण सवाल खड़े हो गए हैं। इनमें से दो सवाल प्रमुख हैं: पहला, जांच टीम वर्तमान कुलपति के बंगले में क्यों गई? और दूसरा, उच्च शिक्षा विभाग द्वारा जांच के लिए निर्धारित बिंदुओं में पांच नए बिंदुओं का समावेश कैसे और किसके कहने पर हुआ?
वर्तमान में रादुविवि के अंदर यह चर्चा जोरों पर है कि इस पूरी जांच प्रक्रिया का संबंध कुलगुरु और कुलसचिव के बीच चल रहे गहरे विवाद से है। कहा जा रहा है कि पूर्व कुलपति प्रोफेसर कपिल देव मिश्र केवल एक बहाना हैं, और उनका कार्यकाल सिर्फ एक ढाल की तरह इस्तेमाल किया जा रहा है, ताकि उन अधिकारियों को निशाना बनाया जा सके जो वर्तमान में रादुविवि में उच्च पदों पर हैं। इन अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई के लिए उनकी कार्यशैली को पूर्व कुलपति के कार्यकाल से जोड़कर देखा जा रहा है।
जांच टीम के द्वारा किए गए दस्तावेजों की जांच में 2017 से लेकर 2023 तक के कई महत्वपूर्ण निर्णय और टेंडर की जांच की गई। इसके साथ ही, जिन अधिकारियों और कर्मचारियों ने इस दौरान महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां निभाई थीं, उनके नामों की सूची भी तैयार की गई है। इनमें फाइनेंस कंट्रोलर, लेखा विभाग के निरीक्षक, स्थापना, परीक्षा और भंडार विभाग के अधिकारी और इंजीनियरिंग विभाग का प्रभारी भी शामिल हैं। इस जांच से वे अधिकारी भी जांच के दायरे में आ गए हैं, जो अब तक खुद को निर्दोष समझ रहे थे।
कर्मचारियों के बीच घमासान..........
इस जांच के चलते विश्वविद्यालय में कर्मचारियों के बीच हलचल मची हुई है। जांच के दौरान शिकायतकर्ताओं के समर्थन में खड़े कुछ कर्मचारी भी अब लपेटे में आ गए हैं, जिससे अंदरूनी विवाद और बढ़ने की संभावना है। कर्मचारियों का मानना है कि इस जांच के जरिए उच्च शिक्षा विभाग और विश्वविद्यालय के कुछ ताकतवर अधिकारी अपनी स्थिति मजबूत करने का प्रयास कर रहे हैं। उच्च शिक्षा विभाग ने प्रोफेसर कपिल देव मिश्र के कार्यकाल के दौरान हुई कथित अनियमितताओं की जांच के लिए एक समिति का गठन किया था। इस समिति की अध्यक्षता रीवा के अतिरिक्त संचालक उच्च शिक्षा आरपी सिंह कर रहे थे, और इसमें रीवा और शहडोल संभाग के शिक्षक तथा कुछ तकनीकी जानकार भी शामिल थे। हालांकि, अब यह सवाल उठ रहे हैं कि इस जांच की पूरी प्रक्रिया पर राजनीति का कितना असर हुआ है, और क्या इससे रादुविवि के विकास और छात्रों के भविष्य पर कोई प्रतिकूल असर पड़ेगा।
आगे का रास्ता..
इस जांच रिपोर्ट के आधार पर क्या कार्रवाई होगी, यह अभी साफ नहीं है, लेकिन यह तो तय है कि विश्वविद्यालय का माहौल काफी तनावपूर्ण हो चुका है। यदि जिम्मेदार लोग अपनी राजनीति में ही व्यस्त रहे, तो रादुविवि और यहां पढ़ने वाले छात्रों का भविष्य गंभीर संकट में पड़ सकता है। उच्च शिक्षा विभाग को चाहिए कि वह इस मामले में जल्द से जल्द स्पष्टता प्रदान करें, ताकि विश्वविद्यालय के भविष्य को सुरक्षित किया जा सके और छात्रों को एक बेहतर शैक्षिक माहौल मिल सके।
