इंदौर में जहरीले पानी से मौतों का मामला: नगर निगम कमिश्नर हटाए गए, दो वरिष्ठ अधिकारी सस्पेंड

दैनिक सांध्य बन्धु (एजेंसी) इंदौर। इंदौर में दूषित पानी से मौतों के मामले में मोहन सरकार ने नगर निगम कमिश्नर दिलीप यादव को हटा दिया है। वहीं, एडिशनल कमिश्नर रोहित सिसोनिया और इंचार्ज सुपरिंटेंडिंग इंजीनियर संजीव श्रीवास्तव को सस्पेंड कर दिया गया है। इस घटना में अब तक 15 लोगों की जान जाने की बात अस्पतालों और स्थानीय लोगों द्वारा कही जा रही है।

इससे पहले सरकार ने संबंधित अधिकारियों को कारण बताओ नोटिस जारी किया था। एडिशनल कमिश्नर रोहित सिसोनिया का ट्रांसफर किया गया था, जबकि संजीव श्रीवास्तव से जल वितरण विभाग का प्रभार वापस ले लिया गया था। मामला फिलहाल हाईकोर्ट में विचाराधीन है और अगली सुनवाई 6 जनवरी को होगी।

हालांकि, राज्य सरकार ने हाईकोर्ट में पेश की गई 39 पेज की स्टेटस रिपोर्ट में दावा किया है कि दूषित पानी से केवल 4 सीनियर सिटीजन की मौत हुई है। सरकार के अनुसार उर्मिला की मौत 28 दिसंबर, तारा और नंदा की 30 दिसंबर तथा हीरालाल की 31 दिसंबर को हुई। इसके विपरीत, मृतकों के परिजन, स्थानीय लोग और अस्पतालों का कहना है कि अब तक 15 लोगों की जान जा चुकी है। भागीरथपुरा में गीताबाई की अंतिम यात्रा के दौरान परिजनों ने भी उनकी मौत का कारण दूषित पानी बताया।

मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. माधव प्रसाद हसानी के अनुसार, एमजीएम मेडिकल कॉलेज की लैब रिपोर्ट में पानी को पीने योग्य नहीं पाया गया है। सैंपल में फीकल कॉलिफॉर्म, ई-कोलाई, विब्रियो और प्रोटोजोआ जैसे खतरनाक बैक्टीरिया मिले हैं। सूत्रों का कहना है कि पानी में हैजा फैलाने वाला विब्रियो कोलेरी भी पाया गया है, लेकिन सरकारी तंत्र इसे प्रारंभिक रिपोर्ट बताकर टाल रहा है। नगर निगम की लैब में जांचे गए करीब 80 सैंपल भी असंतोषजनक पाए गए हैं।

जांच में सामने आया है कि भागीरथपुरा इलाके में एक पुलिस चौकी के पास मुख्य पेयजल पाइपलाइन में रिसाव था, जिसके ऊपर शौचालय बना हुआ है। इसी वजह से इलाके की जलापूर्ति दूषित हुई और लोगों की सेहत पर घातक असर पड़ा।

इस पूरे मामले को लेकर सियासत भी तेज हो गई है। लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने कहा कि इंदौर में पानी नहीं, जहर बांटा गया और प्रशासन कुंभकर्णी नींद में सोता रहा। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने भी सरकार पर तीखा हमला करते हुए कहा कि प्रधानमंत्री हमेशा मौतों पर चुप रहते हैं। वहीं, इस घटना को लेकर प्रदेश सरकार की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।

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