दैनिक सांध्य बन्धु (एजेंसी) मऊगंज। मऊगंज जिले के बनपाडर गांव में जमीन विवाद ने हिंसक रूप ले लिया। रविवार रात कुछ लोगों ने मां-बेटे पर तलवार और टांगी से हमला कर दिया। गंभीर रूप से घायल महिला और उसके बेटे को रीवा के संजय गांधी अस्पताल में भर्ती कराया गया है। पीड़िता का आरोप है कि जब वह जान बचाकर थाने पहुंची, तो वहां मौजूद एसआई ने उसे ‘भौजाई’ कहकर मजाक उड़ाया और समझौते का दबाव बनाते हुए थाने से भगा दिया।
घर में घुसकर हमला, जान से मारने की धमकी
पीड़िता सरिता शर्मा ने बताया कि रविवार रात परिवार के ही प्रमोद पांडे, ऋषभ पांडे, श्रद्धा पांडे, राम गणेश शर्मा और रमाकांत शर्मा जमीन विवाद को लेकर उनके घर में घुस आए। गाली-गलौज के बाद बेटे आकाश पर तलवार और टांगी से हमला किया गया। बीच-बचाव करने पर सरिता पर भी टांगी से वार किया गया। शोर सुनकर पड़ोसी पहुंचे तो आरोपी जान से मारने की धमकी देते हुए भाग गए।
थाने में नहीं हुई सुनवाई, एसआई पर गंभीर आरोप
सरिता का आरोप है कि हमले के बाद वह मऊगंज थाने पहुंची, लेकिन वहां मौजूद एसआई ज्ञानेंद्र पटेल ने ‘भौजाई’ कहकर मजाक उड़ाया और मामला आपसी समझौते से निपटाने की बात कहकर थाने से भगा दिया। पीड़िता का कहना है कि पहले भी शिकायतें की गईं, लेकिन कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई।
तहसील पेशी के दौरान भी मारपीट का आरोप
सरिता ने बताया कि जमीन विवाद को लेकर तहसील में पेशियां चल रही हैं। कुछ दिन पहले पेशी के दौरान आरोपियों ने उनके जेठ के साथ बल्ला और हॉकी से मारपीट की थी। तब से ही आरोपी रंजिश रखे हुए थे और मौका पाकर घर में घुसकर हमला कर दिया।
प्रशासन पर अनसुनी का आरोप
पीड़िता का कहना है कि न तो कलेक्टर और न ही एसपी स्तर पर उनकी शिकायतों पर सुनवाई हो रही है, जिससे आरोपियों के हौसले बढ़े हुए हैं।
पुलिस का पक्ष
टीआई संदीप भारतीय ने कहा कि किसने ‘भौजाई’ कहा, इसकी जानकारी उन्हें नहीं है।
एएसपी विक्रम सिंह के मुताबिक, सरिता शर्मा के बयान पर प्रमोद पांडे, ऋषभ पांडे, राम गणेश शर्मा और रमाकांत शर्मा के खिलाफ केस दर्ज कर लिया गया है। मामले की जांच जारी है।
एसआई ज्ञानेंद्र पटेल ने आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि उन्होंने किसी महिला के साथ ऐसा व्यवहार नहीं किया और विवेचना प्रशासनिक कारणों से अधूरी रह गई थी।
अस्पताल में इलाज जारी
सरिता शर्मा और उनके बेटे आकाश का रीवा के संजय गांधी अस्पताल में इलाज चल रहा है। मामले ने पुलिस की संवेदनशीलता और पीड़ितों की सुनवाई पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
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