MP News: डिजिटल अरेस्ट का डर दिखाकर रिटायर्ड अफसर से 1.12 करोड़ की ठगी, फर्जी IPS–CBI बनकर साइबर ठगों ने बुजुर्ग को महीनों तक मानसिक कैद में रखा

पुलिस अधिकारी बनकर बातचीत करता शख्स। इनसेट में फरियादी।
दैनिक सांध्य बन्धु (एजेंसी) ग्वालियर। साइबर ठगों ने इस बार कानून के नाम पर डर दिखाकर 75 वर्षीय रिटायर्ड उप पंजीयक से 1 करोड़ 12 लाख रुपए की ठगी कर ली। खुद को TRAI अधिकारी, फिर IPS और बाद में CBI अफसर बताकर ठगों ने बुजुर्ग को तथाकथित “डिजिटल अरेस्ट” में रखा और RBI जांच के नाम पर उनकी जमा पूंजी, एफडी और म्यूचुअल फंड तक ट्रांसफर करवा लिए।

TRAI से IPS तक, डर की पूरी स्क्रिप्ट तैयार


16 नवंबर 2025 को खेड़ापति कॉलोनी निवासी बिहारी लाल गुप्ता के मोबाइल पर अनजान कॉल आया। कॉलर ने खुद को TRAI अधिकारी बताते हुए सिम बंद होने और गिरफ्तारी आदेश की बात कही। कुछ ही मिनट बाद वॉट्सऐप वीडियो कॉल आया, जिसमें पुलिस की वर्दी पहने युवक ने खुद को IPS नीरज ठाकुर बताया और मनी लॉन्ड्रिंग केस में नाम होने का डर दिखाया।

CBI जांच का झांसा, RBI की फर्जी रसीदें भेजीं


इसके बाद CBI अधिकारी बनकर कॉल किया गया। कहा गया कि बुजुर्ग का ICICI बैंक खाता दो लाख में बेचा गया है, जिससे करोड़ों का अवैध लेनदेन हुआ। जांच के नाम पर उनके खाते से रकम दूसरे खातों में ट्रांसफर करवाई गई। हर ट्रांजैक्शन के बाद RBI की मुहर लगी फर्जी रसीदें भेजी गईं, जिससे भरोसा बना रहा।

चार ट्रांजैक्शन में 1.12 करोड़ साफ


16 नवंबर 2025 से 3 जनवरी 2026 के बीच चार बार में कुल 1.12 करोड़ रुपए ठगों के बताए खातों में ट्रांसफर करा लिए गए। इस दौरान बुजुर्ग को किसी से बात न करने की सख्त चेतावनी दी गई, वरना तत्काल गिरफ्तारी की धमकी दी जाती रही।

जागरूकता वीडियो से खुली आंखें


दो दिन पहले मोबाइल पर डिजिटल अरेस्ट से सावधान करने वाला वीडियो देखने के बाद पीड़ित को ठगी का एहसास हुआ। जब ठगों के नंबर बंद मिले, तो वे सीधे एसएसपी ग्वालियर के पास पहुंचे। मामले में क्राइम ब्रांच ने एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। एसएसपी ग्वालियर धर्मवीर सिंह ने कहा एक रिटायर्ड अधिकारी को डिजिटल अरेस्ट के नाम पर एक करोड़ से अधिक की ठगी का शिकार बनाया गया है। मामले की गंभीरता से जांच की जा रही है।

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