दैनिक सांध्य बन्धु भोपाल। मध्यप्रदेश की मोहन यादव सरकार नए साल की शुरुआत एक बार फिर कर्ज के साथ कर रही है। सरकार मंगलवार को रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया के माध्यम से बाजार से 4 हजार करोड़ रुपए का नया कर्ज लेने जा रही है। इस कर्ज की राशि बुधवार को राज्य सरकार को प्राप्त होगी। इसके साथ ही चालू वित्त वर्ष में अब तक ली गई कुल उधारी 57,100 करोड़ रुपए तक पहुंच जाएगी।
वित्तीय वर्ष 2025-26 में 1 अप्रैल से 31 दिसंबर तक राज्य सरकार पहले ही 53,100 करोड़ रुपए का कर्ज ले चुकी है। अब नए कर्ज के बाद यह आंकड़ा और बढ़ जाएगा। यह कर्ज तीन अलग-अलग अवधि में लिया जा रहा है। इसमें 1500 करोड़ रुपए का कर्ज 4 साल के लिए, 1500 करोड़ रुपए का कर्ज 12 साल के लिए और 1000 करोड़ रुपए का कर्ज 18 साल की अवधि के लिए होगा। इन सभी कर्जों पर लगने वाले ब्याज का भुगतान सरकार हर साल जनवरी और जुलाई में छमाही आधार पर करेगी।
इससे पहले सरकार ने 30 दिसंबर 2025 को भी बाजार से 3500 करोड़ रुपए का कर्ज लिया था। इसमें 1200 करोड़ रुपए का कर्ज 5 साल के लिए, 1200 करोड़ रुपए का कर्ज 11 साल के लिए और 1100 करोड़ रुपए का कर्ज 23 साल की लंबी अवधि के लिए लिया गया था। इसके अलावा सरकार दिसंबर महीने की शुरुआत में भी बाजार से कर्ज उठा चुकी है।
सरकार की बढ़ती उधारी को लेकर राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप भी तेज हो गए हैं। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने मोहन सरकार पर निशाना साधते हुए कहा है कि सरकार के पास आय बढ़ाने का कोई ठोस विजन नहीं है, इसलिए वह हर महीने कर्ज ले रही है। पटवारी का दावा है कि वर्ष 2025 में ही सरकार एक लाख करोड़ रुपए का कर्ज ले चुकी है और इसका बोझ प्रदेश की जनता पर डाला जा रहा है।
उन्होंने केंद्र सरकार द्वारा मनरेगा योजना का नाम बदलने और योजना का 40 प्रतिशत खर्च राज्य सरकार पर डालने के फैसले पर भी सवाल उठाए हैं। पटवारी का कहना है कि जब राज्य सरकार पहले से ही कर्ज के दबाव में है, तो ऐसे में वह मनरेगा जैसी योजनाओं को कैसे सुचारू रूप से चला पाएगी।
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