दैनिक सांध्य बन्धु इंदौर। इंदौर में दूषित पेयजल से हुई मौतों को लेकर मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की इंदौर बेंच ने कड़ी टिप्पणी की है। मंगलवार को इस मामले से जुड़ी पांच याचिकाओं पर एक साथ सुनवाई करते हुए कोर्ट ने कहा कि इस घटना ने देश के सबसे स्वच्छ शहर कहलाने वाले इंदौर की छवि को गंभीर रूप से नुकसान पहुंचाया है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि स्वच्छ पेयजल केवल इंदौर ही नहीं, बल्कि पूरे प्रदेश की जनता का मौलिक अधिकार है और इससे किसी भी हाल में समझौता नहीं किया जा सकता।
हाईकोर्ट ने राज्य सरकार के जवाब को असंवेदनशील बताते हुए कहा कि यदि भविष्य में जरूरत पड़ी तो दोषी अधिकारियों पर सिविल और क्रिमिनल दोनों तरह की जिम्मेदारी तय की जाएगी। कोर्ट ने यह भी संकेत दिए कि अगर पीड़ितों को दिया गया मुआवजा अपर्याप्त पाया गया तो उस पर भी उचित निर्देश जारी किए जाएंगे। अदालत ने कहा कि संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत जीवन के अधिकार में स्वच्छ पेयजल का अधिकार भी शामिल है और इसकी अनदेखी एक गंभीर विषय है।
सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ताओं ने बताया कि 31 दिसंबर 2025 को हाईकोर्ट ने राज्य सरकार और नगर निगम को स्वच्छ पेयजल आपूर्ति सुनिश्चित करने के निर्देश दिए थे, लेकिन इसके बावजूद प्रभावित इलाकों में दूषित पानी की सप्लाई जारी रही। वकीलों ने दलील दी कि यदि पहले की गई शिकायतों पर समय रहते कार्रवाई की जाती तो इतनी बड़ी जनहानि नहीं होती। कोर्ट को यह भी बताया गया कि वर्ष 2022 में महापौर द्वारा नई पाइपलाइन बिछाने का प्रस्ताव पारित हुआ था, लेकिन फंड जारी न होने के कारण अब तक काम शुरू नहीं हो सका। इसके अलावा 2017-18 में लिए गए पानी के सैंपलों में से अधिकांश के पीने योग्य न पाए जाने की रिपोर्ट के बावजूद ठोस कदम नहीं उठाए गए।
कोर्ट ने राज्य सरकार और नगर निगम को निर्देश दिए हैं कि वे मामले में विस्तृत जवाब दाखिल करें और एक नई स्टेटस रिपोर्ट पेश करें। अगली सुनवाई 15 जनवरी को होगी, जिसमें मुख्य सचिव को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए उपस्थित रहने के निर्देश दिए गए हैं।
उधर, इसी मुद्दे को लेकर कांग्रेस नेताओं का दल प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी और नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार के नेतृत्व में भागीरथपुरा पहुंचा। कांग्रेस नेताओं के दौरे को देखते हुए इलाके में भारी पुलिस बल तैनात किया गया और रास्तों पर बैरिकेडिंग की गई। प्रभावित परिवारों से मिलने के दौरान कांग्रेस नेताओं और पुलिस के बीच बहस भी हुई। बाद में कांग्रेस नेता दूसरे रास्ते से इलाके में पहुंचे और दूषित पानी से जान गंवाने वाले लोगों के परिजनों से मुलाकात की। इस दौरान जीतू पटवारी ने मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव, मंत्री कैलाश विजयवर्गीय और महापौर पुष्यमित्र भार्गव से इस्तीफे की मांग की।
भागीरथपुरा में दूषित पानी पीने से अब तक 17 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि 110 मरीज अलग-अलग अस्पतालों में भर्ती हैं। कुल 421 मरीजों को अब तक अस्पताल लाया गया, जिनमें से 311 को डिस्चार्ज किया जा चुका है। 15 मरीजों का इलाज अभी भी आईसीयू में जारी है। इस पूरे मामले ने प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं और अब हाईकोर्ट की सख्ती से आने वाले दिनों में बड़ी कार्रवाई की संभावना जताई जा रही है।
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