I-PAC पर ईडी रेड को लेकर सियासी घमासान, सुप्रीम कोर्ट से झटका लगते ही आमने-सामने TMC और BJP

दैनिक सांध्य बन्धु (एजेंसी) नई दिल्ली। पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव से पहले चुनावी रणनीतिकार संस्था आई-पैक (I-PAC) के ठिकानों पर प्रवर्तन निदेशालय (ED) की कार्रवाई ने सियासी तापमान बढ़ा दिया है। इस मामले में सुप्रीम कोर्ट से ममता बनर्जी को झटका लगने के बाद तृणमूल कांग्रेस (TMC) और भारतीय जनता पार्टी (BJP) आमने-सामने आ गई हैं। दोनों दलों के नेताओं के बीच तीखी बयानबाजी शुरू हो गई है और आरोप-प्रत्यारोप का दौर तेज हो गया है।

टीएमसी का आरोप है कि ईडी की यह कार्रवाई पूरी तरह राजनीतिक है और चुनाव को प्रभावित करने के इरादे से की गई है। पार्टी प्रवक्ता कुणाल घोष ने कहा कि यह मामला वर्ष 2020 से जुड़ा है, लेकिन एजेंसी कई सालों तक खामोश रही। अब जब विधानसभा चुनाव नजदीक हैं, तब अचानक कार्रवाई होना संदेह पैदा करता है। उन्होंने सवाल उठाया कि आखिर पांच-छह साल तक ईडी क्या कर रही थी और चुनाव से ठीक पहले ही उसे यह मामला क्यों याद आया।

कुणाल घोष ने यह भी दावा किया कि आई-पैक के निदेशक प्रतीक जैन के पास टीएमसी के चुनाव अभियान से जुड़ा अहम डेटा और रणनीति मौजूद है। उनका आरोप है कि बीजेपी ईडी के जरिए इस डेटा तक पहुंचने या टीएमसी की चुनावी तैयारियों को बाधित करने की कोशिश कर रही है। उन्होंने यह भी कहा कि जब प्रशांत किशोर टीएमसी से जुड़े थे, तब इस तरह की कोई कार्रवाई नहीं हुई, लेकिन अब प्रतीक जैन को निशाना बनाया जा रहा है। घोष के मुताबिक, ममता बनर्जी ने पार्टी के डेटा की सुरक्षा के लिए विरोध दर्ज कराया था और जनता यह साफ देख रही है कि यह एक “राजनीतिक तलाशी” है।

वहीं, बीजेपी ने टीएमसी के आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए पलटवार किया है। भाजपा नेता दिलीप घोष ने कहा कि ईडी की कार्रवाई में जिस तरह का व्यवधान डाला गया और जिस तरह से फाइलें छीनी गईं, वह किसी मुख्यमंत्री को शोभा नहीं देता। उन्होंने इसे लोकतंत्र के खिलाफ बताते हुए कहा कि कानून से ऊपर कोई नहीं है और इस तरह की हरकतें गंभीर अपराध की श्रेणी में आती हैं।

इस पूरे घटनाक्रम ने पश्चिम बंगाल की राजनीति में नया मोड़ ला दिया है। जहां टीएमसी इसे केंद्र सरकार की एजेंसियों के दुरुपयोग का मामला बता रही है, वहीं बीजेपी कानून के पालन और जांच एजेंसियों की स्वतंत्रता की बात कर रही है। सुप्रीम कोर्ट के रुख के बाद यह विवाद और गहराता दिख रहा है, जिससे आने वाले दिनों में बंगाल की सियासत और ज्यादा गरमाने के आसार हैं। 

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