दैनिक सांध्य बन्धु जबलपुर। मध्य प्रदेश की राजनीति में लंबे समय तक सुर्खियों में रहे केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान और कांग्रेस सांसद विवेक तन्खा के बीच कानूनी विवाद अब समाप्त हो गया है। सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को इस हाई-प्रोफाइल मानहानि मामले में अंतिम फैसला सुनाते हुए केस को बंद कर दिया।
कोर्ट रूम से बाहर दोनों नेताओं के बीच विवाद आपसी सहमति से सुलझ गया। वरिष्ठ वकील महेश जेठमलानी ने बताया कि संसद में दोनों नेताओं की मुलाकात के बाद सिविल और आपराधिक मानहानि मामले दोनों ही वापस लिए गए। कोर्ट को समझौते की जानकारी दी गई और यह मामला अब पूरी तरह से समाप्त माना गया।
सुप्रीम कोर्ट की पीठ ने इस मामले पर टिप्पणी करते हुए कहा कि नेताओं में सहनशीलता अधिक होनी चाहिए और राजनीति में भाषा अलग होती है, इसलिए संवेदनशील होना जरूरी नहीं है। जस्टिस एम.एन. सुंदरेश और जस्टिस एन. के. सिंह की बेंच ने हल्के फुल्के अंदाज में नेताओं को “मोटी चमड़ी” रखने की सलाह भी दी।
यह विवाद 2021 के मध्य प्रदेश पंचायत चुनावों के दौरान शुरू हुआ था। उस समय ओबीसी आरक्षण को लेकर चर्चा और सुनवाई चल रही थी। कांग्रेस सांसद विवेक तन्खा का आरोप था कि शिवराज सिंह चौहान और अन्य भाजपा नेताओं ने उनके खिलाफ गलत बयान दिए, जिससे उनकी छवि को नुकसान पहुंचा। इसके बाद उन्होंने 10 करोड़ रुपए की सिविल सूट और मानहानि का आपराधिक मुकदमा दायर किया था।
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