दैनिक सांध्य बन्धु (एजेंसी) नई दिल्ली। महिला आरक्षण से जुड़े संविधान संशोधन बिल को लोकसभा में जरूरी बहुमत नहीं मिल सका और यह 54 वोट से गिर गया। कुल 528 सांसदों ने मतदान किया, जिसमें 298 ने समर्थन किया, जबकि 230 सांसदों ने विरोध में वोट डाले। बिल पास कराने के लिए दो-तिहाई बहुमत यानी 352 वोट की जरूरत थी, जो सरकार हासिल नहीं कर पाई।
इस बिल में लोकसभा सीटों को 543 से बढ़ाकर 850 करने और महिला आरक्षण लागू करने से जुड़े प्रावधान शामिल थे। करीब 21 घंटे की लंबी बहस के बाद हुई वोटिंग में यह नतीजा सामने आया। यह पिछले 12 वर्षों में पहला मौका है जब नरेंद्र मोदी सरकार लोकसभा में कोई अहम बिल पास कराने में असफल रही है।
बिल गिरने के बाद राहुल गांधी ने इसे विपक्ष की जीत बताते हुए कहा कि यह संविधान पर हमले को रोकने जैसा है, जबकि प्रियंका गांधी ने इसे लोकतंत्र की जीत करार दिया। वहीं शशि थरूर ने कहा कि वे महिला आरक्षण के पक्ष में हैं, लेकिन इसे परिसीमन से जोड़ना सही नहीं है।
दूसरी ओर, मतदान से पहले गृहमंत्री अमित शाह ने चेतावनी दी थी कि यदि बिल पास नहीं हुआ तो देश की महिलाएं इसका जवाब देंगी। प्रधानमंत्री मोदी समेत सरकार के कई नेताओं ने विपक्ष से समर्थन की अपील भी की थी, लेकिन पर्याप्त संख्या नहीं जुट पाई।
बिल गिरने के बाद संसद के बाहर एनडीए की महिला सांसदों ने प्रदर्शन किया और विपक्ष के खिलाफ नारेबाजी की।
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