दैनिक सांध्य बन्धु जबलपुर। जिला स्वास्थ्य विभाग इस समय वित्तीय अनियमितताओं और प्रशासनिक ढिलाई के चलते विवादों के घेरे में है। ताजा और बेहद गंभीर मामला राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (NHM) के तहत जिले की संजीवनी क्लीनिकों के कायाकल्प के लिए आई लाखों रुपये की राशि के घालमेल से जुड़ा है। राज्य स्तर पर हुई समीक्षा में इस बड़े फर्जीवाड़े का खुलासा होने के बाद हड़कंप मच गया है। मामले को गंभीरता से लेते हुए एनएचएम के अपर मिशन संचालक ने जिला मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (CMHO) डॉ. नवीन कोठारी समेत चार जिम्मेदार अधिकारियों को 'कारण बताओ नोटिस' जारी किया है। नोटिस की तय समय-सीमा बीतने के बाद भी अधिकारियों द्वारा जवाब न दिए जाने से अब उन पर एफआईआर (FIR) और राशि वसूली (Recovery) की कार्रवाई तय मानी जा रही है।
₹58 लाख में से ₹56.98 लाख उड़ाए, काम 'शून्य'
विभागीय जानकारी के अनुसार, वित्तीय वर्ष 2025-2026 में जबलपुर जिले की शहरी स्वास्थ्य संस्थाओं को 'नेशनल क्वालिटी एश्योरेंस मानक' (NQAS) के अनुसार अपग्रेड करने और उनका प्रमाणीकरण (Certification) कराने का लक्ष्य रखा गया था। इसके तहत शहरी स्वास्थ्य कार्यक्रम की गतिविधि के अंतर्गत प्रति संस्था 1 लाख रुपये के मान से कुल 58 संजीवनी क्लीनिकों के लिए 58.00 लाख रुपये का बजट आवंटित किया गया था।
विभागीय रिकॉर्ड के मुताबिक, संबंधित अधिकारियों ने इस बजट में से 56.98 लाख रुपये का उपयोग भी कर लिया। लेकिन जब राज्य स्तर पर इसकी उच्च स्तरीय समीक्षा की गई, तो चौंकाने वाला सच सामने आया। कागजों पर करीब पूरा बजट ठिकाने लगाने के बाद भी जबलपुर जिले की एक भी शहरी स्वास्थ्य संस्था या संजीवनी क्लीनिक का एनक्यूएएस (NQAS) सर्टिफिकेशन नहीं कराया गया और न ही संस्थाएं मानकों के अनुरूप तैयार मिलीं।
इन अधिकारियों को थमाया गया नोटिस
राज्य स्तर से जारी पत्र क्रमांक: एन.एच.एम./शहरी स्वास्थ्य/2026/ई-1241172/06/1023 के तहत सीधे तौर पर घोर लापरवाही और वित्तीय नियमों के उल्लंघन को लेकर निम्नलिखित अधिकारियों को नामजद नोटिस जारी किया गया है:
डॉ. नवीन कोठारी – जिला मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (CMHO)
संदीप नामदेव – सहायक शहरी कार्यक्रम प्रबंधक
शिखा गर्ग – जिला क्वालिटी मॉनिटर
रेखा साहू – जिला लेखा प्रबंधक
'काम दिखाओ, नहीं तो जेल जाओ और पैसे भरो'
इस पूरे मामले को राज्य एनएचएम प्रशासन ने शासकीय धन के दुरुपयोग और वरिष्ठ स्तर के दिशा-निर्देशों की खुली अवहेलना माना है। अपर मिशन संचालक ने सख्त रुख अपनाते हुए अधिकारियों को निर्देशित किया है कि वे 15 दिनों के भीतर इन सभी शहरी स्वास्थ्य संस्थाओं को नेशनल क्वालिटी एश्योरेंस मानक (NQAS) प्रमाणीकरण की तय प्रक्रिया में लाएं और वस्तुस्थिति से अवगत कराएं। ऐसा न होने पर संबंधित अधिकारियों से इस पूरी राशि की व्यक्तिगत रिकवरी की जाएगी।
CMHO डॉ. नवीन कोठारी का कहना है कि उन्होंने 5 अप्रैल 2026 को पदभार संभाला है और यह मामला CMHO संजय मिश्रा के कार्यकाल से जुड़ा है।
विभागीय सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, नोटिस में दी गई 15 दिनों की अनिवार्य मियाद खत्म हो चुकी है, लेकिन अपनी गर्दन फंसती देख संबंधित अधिकारी अब तक कोई संतोषजनक जवाब या ग्राउंड रिपोर्ट राज्य मुख्यालय के समक्ष प्रस्तुत नहीं कर पाए हैं। सूत्रों का कहना है कि अब स्वास्थ्य विभाग के इन आला अधिकारियों पर सीधे एफआईआर (FIR) दर्ज कराने और वेतन व संपत्ति से रिकवरी करने की फाइल आगे बढ़ चुकी है।
