दैनिक सांध्य बन्धु जबलपुर। बरगी डैम में 30 अप्रैल को हुए चर्चित क्रूज हादसे की न्यायिक जांच औपचारिक रूप से शुरू हो गई है। मंगलवार को कलेक्ट्रेट के कक्ष क्रमांक 43 में जांच आयोग के अध्यक्ष जस्टिस संजय द्विवेदी के समक्ष मामले की सुनवाई हुई। सुनवाई के दौरान नागरिक उपभोक्ता मार्गदर्शक मंच ने हादसे से जुड़े कई कानूनी और तकनीकी पहलुओं को आयोग के समक्ष रखा। गौरतलब है कि बरगी डैम में हुए इस हादसे में 13 पर्यटकों की मौत हो गई थी, जिसके बाद पूरे मामले की न्यायिक जांच के आदेश दिए गए थे।
नागरिक उपभोक्ता मार्गदर्शक मंच के अध्यक्ष डॉ. पी.जी. नाजपांडे और अधिवक्ता वेदप्रकाश अधौलिया ने आयोग के समक्ष दायर याचिका में कहा कि इंडियन वेसेल्स एक्ट 2021 के तहत ऐसा कोई प्रावधान नहीं है, जो दुर्घटनाग्रस्त क्रूज को जांच पूरी होने से पहले नष्ट करने की अनुमति देता हो। याचिका में यह भी कहा गया कि जिला प्रशासन को भी ऐसी स्थिति में क्रूज को नष्ट करने का अधिकार नहीं है।
आयोग ने इन बिंदुओं को गंभीरता से लेते हुए कहा कि मंच द्वारा उठाए गए सभी वैधानिक पहलुओं को जांच का हिस्सा बनाया जाएगा। साथ ही आगामी सुनवाई में याचिकाकर्ताओं को अपनी बात रखने का पूरा अवसर देने की बात कही गई।
याचिका में क्रूज संचालन से संबंधित तकनीकी और पर्यावरणीय अनियमितताओं का भी उल्लेख किया गया। मंच का दावा है कि नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) ने 12 सितंबर 2023 के आदेश में जलाशयों में संचालित क्रूज में केवल फोर-स्ट्रोक इंजन के उपयोग के निर्देश दिए थे।
इसके बावजूद दुर्घटनाग्रस्त क्रूज में कथित तौर पर 100 हॉर्सपावर का अपेक्षाकृत कमजोर इंजन लगाया गया था तथा हादसे के समय उसका दूसरा इंजन भी फेल हो गया था। याचिका में यह भी आरोप लगाया गया कि क्रूज संचालकों के पास पर्यावरणीय मानकों से संबंधित आवश्यक वैध प्रमाणपत्र उपलब्ध नहीं थे।
सुनवाई के दौरान यह सवाल भी प्रमुखता से उठा कि जब दुर्घटनाग्रस्त क्रूज को पहले ही नष्ट कर दिया गया है, तो उसकी तकनीकी फिटनेस और संरचनात्मक स्थिति की जांच अब किस आधार पर की जाएगी।
याचिकाकर्ताओं ने एनजीटी के आदेश के पैरा 132 का हवाला देते हुए कहा कि किसी भी जलयान की फिटनेस उसकी सुरक्षा का सबसे महत्वपूर्ण आधार होती है। ऐसे में क्रूज के अवशेष नष्ट होने के बाद उसकी वास्तविक तकनीकी स्थिति का मूल्यांकन करना बेहद कठिन हो जाएगा।
जांच आयोग ने पूरे मामले पर चिंता व्यक्त करते हुए नागरिक उपभोक्ता मार्गदर्शक मंच को निर्देश दिए हैं कि वे अपने दावों एवं आरोपों से संबंधित सभी दस्तावेज, प्रमाण और रिकॉर्ड आयोग के समक्ष प्रस्तुत करें। आयोग ने संकेत दिए हैं कि तकनीकी, पर्यावरणीय और कानूनी सभी पहलुओं की गहन जांच कर हादसे के कारणों और जिम्मेदारियों का निर्धारण किया जाएगा।
मामले की अगली सुनवाई में प्रस्तुत दस्तावेजों और साक्ष्यों के आधार पर आगे की जांच प्रक्रिया को आगे बढ़ाया जाएगा।
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