दैनिक सांध्य बन्धु जबलपुर। विश्व प्रसिद्ध ग्वारीघाट में इन दिनों नर्मदा नदी की स्थिति बेहद चिंताजनक हो गई है। नदी का जलस्तर रिकॉर्ड निचले स्तर पर पहुंच गया है, जिससे कई वर्षों बाद एक ऐसा नजारा देखने को मिल रहा है जो स्थानीय लोगों को हैरान और परेशान कर रहा है। हालात ये हैं कि लोग नदी को पैदल ही पार कर रहे हैं। इस जल संकट का सीधा असर अब शहर की पेयजल आपूर्ति और बिजली उत्पादन पर भी पड़ने लगा है।
सिद्ध घाट पर सूखी जमीन, पैदल गुरुद्वारे पहुंच रहे श्रद्धालु
ग्वारीघाट के अंतर्गत आने वाले सिद्ध घाट पर नर्मदा का जलस्तर सबसे कम दर्ज किया गया है। नदी का बहाव इतना कमजोर पड़ चुका है कि पानी की जगह सूखी जमीन और चट्टानें नजर आने लगी हैं। श्रद्धालु अब नाव का सहारा लिए बिना, सूखी जमीन से पैदल चलते हुए नदी के दूसरी पार स्थित ऐतिहासिक गुरुद्वारे तक पहुंच रहे हैं। स्थानीय नागरिकों के मुताबिक, बीते कई दशकों में नर्मदा का ऐसा रूप कभी नहीं देखा गया।
कमर तक भी नहीं पानी, दलदल और चट्टानों के बीच स्नान की मजबूरी
नर्मदा स्नान के लिए प्रतिदिन ग्वारीघाट पहुंचने वाले हजारों श्रद्धालुओं को भारी असुविधा का सामना करना पड़ रहा है। घाट के किनारे पानी पूरी तरह सूख चुका है। नदी के बीच हिस्से तक जाने के बाद भी कई जगह पानी सिर्फ कमर तक ही पहुंच पा रहा है। श्रद्धालुओं को ऊबड़-खाबड़ और नुकीली चट्टानों के बीच जैसे-तैसे स्नान करना पड़ रहा है। इसके अलावा, पानी घटने से नदी के तल में जमी 'चोई' (दलदली कीचड़) ऊपर आ गई है, जिससे श्रद्धालुओं के पैर फंसने और दुर्घटना होने का खतरा बढ़ गया है।
गहरा सकता है बिजली और पानी का संकट
नर्मदा के इस सूखे रूप ने केवल श्रद्धालुओं की आस्था ही नहीं, बल्कि शहर की नागरिक व्यवस्थाओं को भी संकट में डाल दिया है। स्थानीय निवासियों और जानकारों के अनुसार, नदी में पानी का इनफ्लो (आवक) बेहद कम होने के कारण शहर के विभिन्न हिस्सों में होने वाली जल सप्लाई व्यवस्था प्रभावित होने लगी है। इसके साथ ही, नर्मदा जल पर निर्भर रहने वाले बिजली उत्पादन संयंत्रों पर भी इसका विपरीत असर पड़ रहा है, जिससे आने वाले दिनों में बिजली कटौती का सामना करना पड़ सकता है। लगातार घटता यह जलस्तर आने वाले समय के लिए एक बड़े जल संकट का साफ संकेत दे रहा है।
इन्होने कहा
मैं बचपन से ग्वारीघाट आ रहा हूँ, लेकिन अपने पूरे जीवन
में पहली बार नर्मदा मैया का जलस्तर इतना कम देखा है। नदी को इस तरह पैदल
पार करना बेहद चिंताजनक है।"
— कृष्णा चौधरी, स्थानीय निवासी
