दैनिक सांध्य बन्धु (एजेंसी) इंदौर। राजा रघुवंशी हत्याकांड की मुख्य आरोपी सोनम रघुवंशी ने सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के बाद शिलॉन्ग ट्रायल कोर्ट में सरेंडर कर दिया है। अब मामले में दो अहम कानूनी सवाल चर्चा में हैं—क्या छह माह की ट्रायल अवधि सरेंडर की तारीख से मानी जाएगी या सुप्रीम कोर्ट के 23 जुलाई के आदेश से, और क्या ट्रायल के दौरान सोनम दोबारा जमानत की याचिका दाखिल कर सकती है।
कानूनी विशेषज्ञ एडवोकेट आशीष एस. शर्मा के अनुसार, सुप्रीम कोर्ट के आदेश में छह माह की समय-सीमा सरेंडर की तारीख से नहीं, बल्कि 23 जुलाई 2025 को पारित आदेश की तारीख से प्रभावी मानी जाएगी। यदि ट्रायल तय समय में पूरा होता है तो मामले में जनवरी तक फैसला आने की संभावना है।
सुप्रीम कोर्ट ने अपने आदेश में सोनम को तीन सप्ताह के भीतर ट्रायल कोर्ट में सरेंडर करने का निर्देश दिया था। साथ ही कहा था कि यदि छह माह के भीतर ट्रायल अपेक्षित गति से आगे नहीं बढ़ता या पूरा नहीं होता, तो वह दोबारा जमानत के लिए आवेदन कर सकती है।
विशेषज्ञों का कहना है कि यदि ट्रायल के दौरान कोई नया कानूनी आधार, गंभीर स्वास्थ्य समस्या या गवाहों की जिरह में ऐसा नया तथ्य सामने आता है जो मामले को प्रभावित करता हो, तो छह माह पूरे होने से पहले भी नई जमानत याचिका दायर की जा सकती है।
अभियोजन पक्ष के अनुसार, इस मामले में परिस्थितिजन्य, इलेक्ट्रॉनिक और वैज्ञानिक साक्ष्य अहम भूमिका निभाएंगे। अदालत में सभी सबूतों की मजबूत और निरंतर कड़ी साबित होने पर ही आरोपियों के खिलाफ दोष सिद्ध किया जा सकेगा।
कानूनविदों का मानना है कि समय से पहले सरेंडर कर सोनम ने अदालत के आदेश का पालन करने और न्यायिक प्रक्रिया में सहयोग का संदेश देने की कोशिश की है। इससे भविष्य में जमानत याचिका के दौरान उसका यह तर्क मजबूत हो सकता है कि उसने अदालत के निर्देशों का पूरी तरह पालन किया। हालांकि, केवल समय पर सरेंडर करना जमानत मिलने का स्वतः आधार नहीं माना जाएगा।
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