दैनिक सांध्य बन्धु (एजेंसी) नई दिल्ली। संसद के मानसून सत्र में पिछले 20 दिनों से जारी गतिरोध के बीच गृह मंत्री अमित शाह ने बुधवार को विपक्ष से चर्चा शुरू करने की अपील की। शाह ने कहा कि सरकार हर मुद्दे पर चर्चा के लिए तैयार है और वह सदन में विपक्ष की बात सुनने के बाद अगले दिन जवाब देंगे।
अमित शाह ने कहा कि विपक्ष आज दोपहर 3 बजे से चर्चा शुरू करे। उन्होंने कहा, “मैं सदन में बैठूंगा, सबको सुनूंगा और कल 3 बजे सबको जवाब दूंगा।” गृह मंत्री ने विपक्ष पर सदन की कार्यवाही बाधित करने का आरोप लगाते हुए कहा कि सरकार के पास छिपाने के लिए कुछ नहीं है।
शाह के बयान पर लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने पलटवार किया। उन्होंने कहा कि विपक्ष को अमित शाह के भाषण में दिलचस्पी नहीं है। राहुल गांधी ने जंतर-मंतर पर छात्र प्रदर्शन के दौरान पुलिस कार्रवाई को लेकर सवाल उठाते हुए पूछा कि छात्रों पर गोली किसने चलवाई और उन्हें लाठीचार्ज करने का आदेश किसने दिया।
राहुल गांधी ने कहा कि यदि छात्रों पर गोली चलाने का आदेश गृह मंत्री ने दिया था तो उन्हें इस्तीफा देना चाहिए। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि अमित शाह पिछले 20 दिनों से सदन में नहीं आ रहे हैं।
इससे पहले कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने भी छात्र प्रदर्शनों पर पुलिस कार्रवाई को लेकर गृह मंत्री से जवाब मांगा। विपक्षी सांसदों ने संसद परिसर में ‘अमित शाह जवाब दो’ के नारे लगाए।
बुधवार सुबह लोकसभा और राज्यसभा की कार्यवाही शुरू होते ही विपक्षी सांसदों ने हंगामा किया। इसके बाद दोनों सदनों की कार्यवाही स्थगित करनी पड़ी। राज्यसभा की कार्यवाही करीब 20 मिनट बाद दोपहर 2 बजे तक स्थगित कर दी गई, जबकि लोकसभा भी 2 बजे तक स्थगित रही।
संसद में छात्र आंदोलन और पुलिस कार्रवाई के मुद्दे के अलावा FCRA संशोधन विधेयक भी चर्चा में है। सरकार इस विधेयक को संयुक्त संसदीय समिति (JPC) के पास भेजने पर विचार कर रही है। विपक्ष का आरोप है कि विधेयक से NGOs और अल्पसंख्यक संस्थाओं की विदेशी फंडिंग प्रभावित हो सकती है, जबकि सरकार का कहना है कि इसका उद्देश्य विदेशी फंडिंग में पारदर्शिता और निगरानी बढ़ाना है।
इस बीच जस्टिस यशवंत वर्मा से जुड़े कैश बरामदगी मामले की जांच रिपोर्ट भी बुधवार को संसद में पेश किए जाने की जानकारी दी गई है। जांच समिति ने मामले में प्रथम दृष्टया आधार पाए जाने और जस्टिस वर्मा को कदाचार का दोषी मानते हुए उन्हें पद से हटाने की सिफारिश की थी।
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