दैनिक सांध्य बन्धु (एजेंसी) भोपाल। कर्नल सोफिया कुरैशी पर विवादित टिप्पणी के मामले में मध्य प्रदेश सरकार मंत्री विजय शाह के खिलाफ अभियोजन की स्वीकृति नहीं देगी। सूत्रों के मुताबिक, मंगलवार को हुई कैबिनेट बैठक में इस संबंध में फैसला लिया गया। हालांकि, सरकार की ओर से अभी इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है।
बताया जा रहा है कि इस मुद्दे पर चर्चा के दौरान मंत्री विजय शाह भी बैठक में मौजूद थे। चर्चा शुरू होने पर अधिकारियों को बैठक से बाहर कर दिया गया। इसके बाद मुख्यमंत्री, मंत्रियों और वरिष्ठ अधिकारियों की मौजूदगी में मामले पर विचार किया गया।
सूत्रों के अनुसार, अभियोजन स्वीकृति नहीं देने के पीछे शाह द्वारा विवादित बयान को लेकर कई बार सार्वजनिक रूप से माफी मांगने को आधार बनाया गया है। हालांकि, कैबिनेट बैठक के बाद ब्रीफिंग के दौरान मंत्री राकेश सिंह ने इस मामले पर चर्चा होने से ही इनकार कर दिया।
मंत्री विजय शाह के खिलाफ अभियोजन स्वीकृति का मामला लंबे समय से लंबित है। मामले की जांच के लिए गठित एसआईटी ने भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 196(1)(a) के तहत अभियोजन की अनुमति मांगी थी। सुप्रीम कोर्ट में 31 अगस्त को इस मामले की सुनवाई प्रस्तावित है। इससे पहले राज्य सरकार अपना पक्ष एफिडेविट के माध्यम से कोर्ट के सामने रखेगी।
सीनियर एडवोकेट और राज्यसभा सांसद विवेक तन्खा ने कहा है कि सुप्रीम कोर्ट सरकार के इस फैसले को बदल सकता है। अगली सुनवाई में यह स्पष्ट हो सकता है कि सरकार ने अभियोजन की अनुमति नहीं देने के पीछे क्या आधार रखा है।
विजय शाह ने 11 मई 2025 को इंदौर के महू के रायकुंडा गांव में आयोजित हलमा कार्यक्रम के दौरान कर्नल सोफिया कुरैशी को लेकर विवादित बयान दिया था। यह बयान ऑपरेशन सिंदूर के संदर्भ में दिया गया था, जिसके बाद इस पर व्यापक विवाद हुआ था।
जनवरी 2026 में सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई के दौरान सामने आया था कि एसआईटी अपनी जांच पूरी कर अंतिम रिपोर्ट दे चुकी है, लेकिन अभियोजन की स्वीकृति राज्य सरकार के पास लंबित है। कोर्ट ने सरकार को इस पर निर्णय लेने के लिए समय भी दिया था।
सरकार की ओर से अभियोजन की स्वीकृति नहीं दिए जाने के बावजूद मामला पूरी तरह खत्म नहीं होगा। विशेषज्ञों के मुताबिक, यदि भविष्य में शाह मंत्री पद पर नहीं रहते हैं तो परिस्थितियों के अनुसार एसआईटी उनके खिलाफ आगे की कानूनी कार्रवाई कर सकती है और उस स्थिति में पूर्व सरकारी अनुमति की आवश्यकता नहीं होने का सवाल उठ सकता है। सुप्रीम कोर्ट की आगामी सुनवाई में सरकार के रुख और आगे की कार्रवाई की स्थिति स्पष्ट होने की संभावना है।
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