दैनिक सांध्य बन्धु (एजेंसी) छतरपुर। बागेश्वर धाम के पीठाधीश्वर पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने मध्यप्रदेश में पूर्ण शराबबंदी की मांग उठाई है। उन्होंने मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव से प्रदेश में शराब की दुकानें जल्द बंद करने की अपील करते हुए कहा कि मध्यप्रदेश को नशामुक्त बनाना समय की जरूरत है। शास्त्री ने सागर जिले के बंडा क्षेत्र में जहरीली शराब पीने से हुई मौतों पर चिंता जताते हुए कहा कि किसी ने अपना भाई खोया, किसी ने पिता और किसी ने परिवार का सदस्य। यदि प्रदेश में शराबबंदी लागू होती है, तो ऐसी त्रासदियों को रोकने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाया जा सकता है।
पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री बुंदेलखंड में आयोजित अपनी 'सनातन हिंदू एकता रथयात्रा 3.0' के समापन से पहले विशेष बातचीत कर रहे थे। पांच दिनों तक चली इस यात्रा में उन्होंने पांच जिलों में करीब 500 किलोमीटर का सफर तय किया। यात्रा बागेश्वर धाम से शुरू होकर पन्ना, दमोह, सागर और टीकमगढ़ से गुजरी। इस दौरान सनातन हिंदू एकता के साथ नशामुक्ति का संदेश भी दिया गया।
शराबबंदी को बताया प्रदेश के लिए बड़ी सौगात
मध्यप्रदेश में नशामुक्ति के लिए मुख्यमंत्री से क्या अपील करेंगे, इस सवाल पर धीरेंद्र शास्त्री ने कहा कि मुख्यमंत्री को जल्द से जल्द प्रदेश की शराब की दुकानें बंद करने की दिशा में कदम उठाना चाहिए। उन्होंने कहा कि यदि ऐसा होता है, तो इससे पूरे प्रदेश को प्रसन्नता होगी।
शास्त्री ने कहा कि लाड़ली बहना योजना के बाद शराबमुक्त मध्यप्रदेश प्रदेशवासियों के लिए बड़ी सौगात साबित हो सकता है। उन्होंने जहरीली शराब से प्रभावित परिवारों के दर्द का जिक्र करते हुए कहा कि शराब के कारण किसी परिवार को अपना सदस्य नहीं खोना पड़े, इसके लिए नशामुक्ति की दिशा में गंभीर प्रयास जरूरी हैं।
पांच जिलों में दिखा उत्साह, लाखों लोगों के शामिल होने का दावा
रथयात्रा के दौरान मिले जनसमर्थन पर धीरेंद्र शास्त्री ने कहा कि बुंदेलखंड की यह यात्रा उनके लिए अद्भुत अनुभव रही। उनके मुताबिक, बड़ी संख्या में लोग सड़कों पर एकत्रित हुए। श्रद्धालु घंटों तक इंतजार करते रहे और कीर्तन के साथ यात्रा में शामिल हुए।
उन्होंने कहा कि यह केवल सनातन के प्रदर्शन की यात्रा नहीं, बल्कि सनातन के दर्शन और समाज को एकजुट करने का प्रयास था। यात्रा में हिंदुओं की एकता के साथ नशामुक्ति पर विशेष जोर दिया गया और लोगों को नशे से दूर रहने का संकल्प दिलाया गया।
शास्त्री ने उम्मीद जताई कि इस अभियान से समाज में सकारात्मक बदलाव आएगा। उनका कहना था कि समाज की सोच बदलेगी, तो समाज सुधरेगा और समाज के सुधरने से देश में भी परिवर्तन आएगा।
अगली यात्रा भी नशामुक्ति के नाम
अगली यात्रा की योजना के बारे में पूछे जाने पर धीरेंद्र शास्त्री ने स्पष्ट किया कि उनका अगला अभियान भी नशामुक्ति पर केंद्रित रहेगा। उन्होंने कहा कि जल्द ही इसकी तैयारी की जाएगी और गांव-गांव, गली-गली तक नशामुक्ति का संदेश पहुंचाने की कोशिश होगी।
उन्होंने यात्रा के अनुभव से जुड़ी एक महत्वपूर्ण बात भी साझा की। शास्त्री के मुताबिक, अगली बार यात्रा के दौरान प्रतिदिन 100 किलोमीटर का सफर तय करने के बजाय इसे घटाकर करीब 50 किलोमीटर रखा जाएगा, ताकि लोगों से अधिक संवाद किया जा सके और उनकी बातों को सुनने का पर्याप्त समय मिल सके।
विरोध करने वालों को भी गले लगाने की बात कही
यात्रा को रोकने की चर्चाओं और विरोध के सवाल पर धीरेंद्र शास्त्री ने कहा कि उन्हें प्रत्यक्ष रूप से कोई विरोध करने वाला नजर नहीं आया। उन्होंने कहा कि यदि कोई सामने आकर उनसे बात करता, तो वे उसे भी गले लगाकर समझाने का प्रयास करते।
शास्त्री ने कहा कि बातचीत और संवाद के जरिए लोगों के विचार बदले जा सकते हैं। उनके अनुसार, यह यात्रा राममय विचारों और समाज में एकता स्थापित करने के उद्देश्य से निकाली गई थी।
दमोह के पिता और बच्चे की घटना ने छुआ दिल
पांच दिनों की यात्रा का सबसे भावुक पल साझा करते हुए धीरेंद्र शास्त्री ने दमोह जिले की एक घटना का जिक्र किया। उन्होंने बताया कि भीड़ के बीच एक पिता अपने छोटे बच्चे को सिर पर उठाकर ले जा रहा था। जब उससे बच्चे को इस तरह ले जाने की वजह पूछी गई, तो उसने बताया कि बच्चा सुबह से खाना नहीं खा रहा था, क्योंकि वह यात्रा में शामिल होकर धीरेंद्र शास्त्री के दर्शन करना चाहता था।
शास्त्री के अनुसार, पिता ने बच्चे को समझाने की कोशिश की थी, लेकिन वह अपनी जिद पर अड़ा रहा। इस घटना ने उनके हृदय को छू लिया। उन्होंने कहा कि पांचों जिलों में कई ऐसे पल आए, जिन्होंने उन्हें भावुक किया।
स्वयंसेवकों से जल्द करेंगे संवाद
यात्रा के दौरान अपने शिष्य मंडल और सहयोगियों को पर्याप्त समय नहीं दे पाने पर धीरेंद्र शास्त्री ने क्षमा भी मांगी। उन्होंने कहा कि बागेश्वर धाम में जल्द ही एक महासम्मेलन आयोजित कर यात्रा में सेवा देने वाले लोगों के साथ बैठक और संवाद किया जाएगा।
उन्होंने आगे कहा कि यात्रा के दौरान लोगों को जो संकल्प दिलाए गए हैं, उन्हें धरातल पर उतारने के लिए स्थानीय स्तर पर अभियान चलाने की जरूरत है। इसके तहत अलग-अलग जिलों और मंडलों में नुक्कड़ कार्यक्रमों के जरिए लोगों को जागरूक करने का प्रयास किया जाएगा।
धीरेंद्र शास्त्री ने कहा कि पदयात्रा की सफलता रथयात्रा है और रथयात्रा की सफलता रामराज्य है। उनके मुताबिक, विचारों में बदलाव और समाज में सकारात्मक सोच विकसित करने से ही वास्तविक परिवर्तन संभव है।
पांच दिनों की यात्रा के दौरान लगातार व्यस्त रहने के कारण अपनी मां से बात नहीं कर पाने का जिक्र करते हुए उन्होंने मुस्कुराते हुए कहा कि मां से मिलने पर उन्हें यह सुनना पड़ सकता है कि कम से कम एक बार याद तो कर लेते। उन्होंने कहा कि यात्रा में मेहनत जरूर हुई है, लेकिन उन्हें भरोसा है कि इस प्रयास का सकारात्मक परिणाम आने वाली पीढ़ियों तक पहुंचेगा।
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