MP News: इंदौर में जलसंकट की आहट, महापौर ने मांगा 50 करोड़ का पैकेज, मंत्री कैलाश विजयवर्गीय और तुलसी सिलावट ने अधिकारियों के साथ की बैठक

दैनिक सांध्य बन्धु (एजेंसी) इंदौर। मध्य प्रदेश की आर्थिक राजधानी इंदौर में कमजोर मानसून के चलते आगामी गर्मियों में जलसंकट गहराने की आशंका बढ़ गई है। शहर में सामान्य तौर पर करीब 37 इंच बारिश होती है, लेकिन इस बार लगभग 23 इंच बारिश ही दर्ज की गई है। कम बारिश और जलस्रोतों में अपेक्षाकृत कम पानी जमा होने के कारण पेयजल व्यवस्था को लेकर चिंता बढ़ गई है। स्थिति को देखते हुए महापौर पुष्यमित्र भार्गव ने मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव से जल प्रबंधन और जलसंकट से निपटने के लिए 50 करोड़ रुपये के विशेष पैकेज की मांग की है।

जलसंकट की आशंका और उससे निपटने की तैयारियों को लेकर गुरुवार सुबह नगरीय विकास एवं आवास मंत्री कैलाश विजयवर्गीय तथा जल संसाधन मंत्री तुलसी सिलावट ने नगर निगम और संबंधित विभागों के अधिकारियों के साथ बैठक की। बैठक में शहर की जलापूर्ति व्यवस्था, उपलब्ध जलस्रोतों, संभावित चुनौतियों और भविष्य की जरूरतों पर चर्चा की गई।

40 लाख की आबादी, रोजाना 800 एमएलडी पानी की जरूरत

इंदौर की आबादी करीब 40 लाख है। शहर में घरेलू उपयोग के लिए प्रतिदिन लगभग 620 एमएलडी पानी की आवश्यकता होती है। वहीं औद्योगिक, व्यावसायिक, संस्थागत और अन्य जरूरतों को मिलाकर पानी की कुल मांग 750 से 800 एमएलडी तक पहुंच जाती है। इतनी बड़ी मांग को पूरा करना कम बारिश की स्थिति में नगर निगम और संबंधित विभागों के लिए चुनौती बन सकता है।

वर्ष 2008 में भी इंदौर में करीब 20 इंच बारिश हुई थी, जिसके बाद जलसंकट की स्थिति पैदा हो गई थी। अब करीब 18 साल बाद एक बार फिर कम बारिश के कारण गर्मियों में पानी की उपलब्धता को लेकर चिंता जताई जा रही है।

नर्मदा जलापूर्ति पर बड़ी आबादी निर्भर

इंदौर में पेयजल की जरूरतों को पूरा करने में नर्मदा जलापूर्ति की अहम भूमिका है। शहरवासियों को नर्मदा परियोजना से प्रतिदिन करीब 440 एमएलडी पानी मिलता है। हालांकि, पाइपलाइन लीकेज और अन्य तकनीकी कारणों से लगभग 22 प्रतिशत तक पानी बर्बाद होने का अनुमान है। यदि इस नुकसान को कम किया जाए तो उपलब्ध पानी का बेहतर उपयोग किया जा सकता है।

शहर में एक लाख से अधिक निजी बोरवेल के अलावा नगर निगम के करीब 6,500 बोरवेल और हाइड्रेंट भी हैं। इसके बावजूद भूजल पर बढ़ता दबाव चिंता का विषय बना हुआ है। केंद्रीय भूजल बोर्ड की 2025 की रिपोर्ट में इंदौर के शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों को क्रिटिकल जोन में रखे जाने का उल्लेख है। रिपोर्ट के अनुसार, भूजल दोहन का स्तर करीब 90 प्रतिशत तक पहुंच चुका है।

डीमार्ट के पास फूटी नर्मदा पाइपलाइन, सड़क पर बहा पानी

जलसंकट की आशंकाओं के बीच गुरुवार सुबह बंगाली चौराहे से बायपास के बीच डीमार्ट के पास नर्मदा की पाइपलाइन फूट गई। पाइपलाइन से तेज दबाव के साथ पानी निकलने से करीब 40 फीट ऊंचा फव्वारा बन गया। सड़क पर पानी भरने से यातायात प्रभावित हुआ और अंडरपास को भी बंद करना पड़ा। यह घटना शहर की जलापूर्ति व्यवस्था में पाइपलाइन की देखरेख और लीकेज रोकने की जरूरत को भी उजागर करती है।

पिछली गर्मियों में 700 टैंकरों से पहुंचाना पड़ा था पानी

इंदौर में पिछली गर्मियों के दौरान बोरवेल पर निर्भर आबादी के करीब 40 प्रतिशत हिस्से को गंभीर जलसंकट का सामना करना पड़ा था। हालात संभालने के लिए लगभग 700 टैंकरों के माध्यम से पानी की आपूर्ति करनी पड़ी थी। ऐसे में इस बार कम बारिश, तालाबों में कम जलभराव, भूजल का लगातार दोहन और पाइपलाइन नेटवर्क में पानी की बर्बादी प्रशासन की मुश्किलें बढ़ा सकती है।

27 तालाबों में अपेक्षित जलभराव नहीं

इंदौर शहर में कुल 27 तालाब हैं, जिनमें से सात की निगरानी नगर निगम करता है। इन तालाबों की कुल क्षमता करीब 2,880 करोड़ लीटर बताई गई है, जबकि उपलब्ध पानी का एक अन्य आकलन करीब 2,260 करोड़ लीटर है। कम बारिश के कारण इस बार तालाबों में अपेक्षित जलभराव नहीं होने से भविष्य में पानी की उपलब्धता को लेकर चिंता बढ़ गई है।

शहर के कई वार्डों में ओवरहेड टंकियों की सुविधा नहीं है। ऐसे क्षेत्रों में दूसरे वार्डों की टंकियों के माध्यम से पानी पहुंचाया जाता है। इससे जलापूर्ति के समय और मात्रा पर अतिरिक्त दबाव पड़ता है। पिछले साल मालवा मिल स्थित हाइड्रेंट को भी पहली बार बंद करना पड़ा था।

बोरवेल के पानी की गुणवत्ता भी चिंता का विषय

इंदौर में जलसंकट के साथ भूजल की गुणवत्ता भी एक महत्वपूर्ण मुद्दा है। वर्ष 2019 में प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की ओर से शहर में 70 स्थानों पर बोरवेल के पानी के नमूनों की जांच की गई थी। इनमें से 69 नमूने निर्धारित मानकों पर खरे नहीं उतरे थे। यह स्थिति भूजल के उपयोग के साथ उसकी नियमित जांच और गुणवत्ता की निगरानी की आवश्यकता को रेखांकित करती है।

कम बारिश के बाद इंदौर में जल प्रबंधन को लेकर प्रशासन की चुनौती बढ़ गई है। अब जलस्रोतों का संरक्षण, पाइपलाइन लीकेज पर नियंत्रण, भूजल के दोहन को सीमित करना और जरूरत के अनुसार वैकल्पिक व्यवस्था तैयार करना महत्वपूर्ण होगा। महापौर द्वारा मांगे गए 50 करोड़ रुपये के पैकेज पर निर्णय और संबंधित विभागों की तैयारियां आने वाले गर्मी के मौसम में शहर की जलापूर्ति के लिए अहम साबित हो सकती हैं।

Post a Comment

Previous Post Next Post