दैनिक सांध्य बन्धु जबलपुर। शारदीय नवरात्र के दौरान मां दुर्गा के दर्शन, आकर्षक झांकियों को देखने और बाजारों में खरीदारी के लिए उमड़ी भीड़ ने जबलपुर की यातायात व्यवस्था की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। शाम ढलते ही शहर के प्रमुख बाजारों और व्यस्त मार्गों पर वाहनों की लंबी कतारें लग रही हैं। हालात ऐसे बने कि कई स्थानों पर लोगों को महज 500 मीटर की दूरी तय करने में एक से दो घंटे तक लग रहे हैं। जाम में आम नागरिकों के साथ महिलाएं, बुजुर्ग, बच्चे और दर्शनार्थी परेशान हो रहे हैं।
बड़ा फुहारा, गोरखपुर बाजार, सदर, गढ़ा, रांझी, गढ़ा फाटक, पड़ाव, सराफा, गोहलपुर, आधारताल, स्नेह नगर, लेबर चौक, रसाल चौक और शास्त्री ब्रिज सहित कई प्रमुख क्षेत्रों में यातायात प्रभावित हो रहा है। त्योहार की रौनक के बीच सड़कों पर वाहनों की भीड़ और अव्यवस्थित आवाजाही ने लोगों की परेशानी बढ़ा दी है।
शाम होते ही सड़कों पर थम रहे वाहनों के पहिए
नवरात्र के दौरान प्रमुख झांकी स्थलों और बाजारों में शाम के समय बड़ी संख्या में लोग पहुंच रहे हैं। इसी के साथ दोपहिया और चारपहिया वाहनों का दबाव भी बढ़ गया है। कई प्रमुख चौराहों पर यातायात नियंत्रित करने के पर्याप्त इंतजाम नजर नहीं आ रहे हैं। देखते ही देखते वाहनों की लंबी कतारें लग रही हैं।
जाम में फंसे वाहन चालक आगे निकलने की कोशिश में अपने वाहन आड़े-तिरछे करने पड़ रहे हैं, जिससे रास्ता और संकरा हो रहा है। कारें रेंगती रहीं, जबकि दोपहिया वाहन चालक गलियों से निकलने का रास्ता तलाशते नजर आ रहे हैं। कई मार्गों पर यातायात लंबे समय तक बाधित रहा है।
पैदल चलने वालों को भी नहीं मिल रही राहत
जाम का असर केवल वाहन चालकों तक सीमित नहीं है। बाजारों में खरीदारी करने पहुंचे परिवारों और मां दुर्गा के दर्शन के लिए निकले श्रद्धालुओं को भी भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। कई स्थानों पर वाहनों के फुटपाथ तक पहुंच जाने से पैदल चलने वालों के लिए जगह कम पड़ गई है।
छोटे बच्चों को गोद में लेकर चल रही महिलाओं और बुजुर्गों को भीड़ के बीच से निकलने में दिक्कत हो रही है। त्योहार के उल्लास के बीच लोग यातायात की अव्यवस्था से परेशान दिखाई दे रहे हैं। जाम के कारण एंबुलेंस और फायर ब्रिगेड जैसे आपातकालीन वाहनों की आवाजाही भी प्रभावित हो रही है।
चौराहों पर यातायात प्रबंधन को लेकर उठे सवाल
नवरात्र के दौरान हर साल बड़ी संख्या में श्रद्धालु और खरीदार शहर के प्रमुख बाजारों में पहुंचते हैं। इसके बावजूद इस बार भी कई व्यस्त मार्गों पर जाम की स्थिति बनने से यातायात प्रबंधन पर सवाल उठ रहे हैं। नागरिकों का आरोप है कि प्रमुख चौराहों और संवेदनशील मार्गों पर पर्याप्त पुलिस बल की तैनाती दिखाई नहीं दे रही है। लोगों का कहना है कि जब नवरात्र के दौरान भीड़ बढ़ने का अनुमान पहले से रहता है, तो यातायात पुलिस और संबंधित विभागों को पहले से तैयारी करनी चाहिए थी।
अस्थायी पार्किंग और रूट डायवर्जन की जरूरत
शहर में नवरात्र के दौरान यातायात व्यवस्था को सुचारु बनाए रखने के लिए प्रमुख पूजा पंडालों और झांकी स्थलों के आसपास नो-पार्किंग क्षेत्र चिह्नित करने की जरूरत है। इसके साथ ही खाली मैदानों में अस्थायी पार्किंग की व्यवस्था की जा सकती है, ताकि वाहन मुख्य सड़कों पर खड़े न हों।
व्यस्त बाजारों और प्रमुख मार्गों के लिए रूट डायवर्जन प्लान तैयार कर उसे समय रहते सार्वजनिक करना भी जरूरी है। इससे श्रद्धालुओं और आम नागरिकों को वैकल्पिक मार्गों की जानकारी मिल सकेगी और मुख्य सड़कों पर वाहनों का दबाव कम किया जा सकेगा।
नवरात्र जैसे बड़े धार्मिक आयोजन शहर की यातायात व्यवस्था के लिए हर साल चुनौती बनते हैं। ऐसे में बेहतर योजना, पर्याप्त पुलिस बल की तैनाती और पार्किंग की समुचित व्यवस्था से ही लोगों को घंटों जाम में फंसने से राहत मिल सकती है।
बड़ा फुहारा, गोरखपुर बाजार, सदर, गढ़ा, रांझी, गढ़ा फाटक, पड़ाव, सराफा, गोहलपुर, आधारताल, स्नेह नगर, लेबर चौक, रसाल चौक और शास्त्री ब्रिज सहित कई प्रमुख क्षेत्रों में यातायात प्रभावित हो रहा है। त्योहार की रौनक के बीच सड़कों पर वाहनों की भीड़ और अव्यवस्थित आवाजाही ने लोगों की परेशानी बढ़ा दी है।
शाम होते ही सड़कों पर थम रहे वाहनों के पहिए
नवरात्र के दौरान प्रमुख झांकी स्थलों और बाजारों में शाम के समय बड़ी संख्या में लोग पहुंच रहे हैं। इसी के साथ दोपहिया और चारपहिया वाहनों का दबाव भी बढ़ गया है। कई प्रमुख चौराहों पर यातायात नियंत्रित करने के पर्याप्त इंतजाम नजर नहीं आ रहे हैं। देखते ही देखते वाहनों की लंबी कतारें लग रही हैं।
जाम में फंसे वाहन चालक आगे निकलने की कोशिश में अपने वाहन आड़े-तिरछे करने पड़ रहे हैं, जिससे रास्ता और संकरा हो रहा है। कारें रेंगती रहीं, जबकि दोपहिया वाहन चालक गलियों से निकलने का रास्ता तलाशते नजर आ रहे हैं। कई मार्गों पर यातायात लंबे समय तक बाधित रहा है।
पैदल चलने वालों को भी नहीं मिल रही राहत
जाम का असर केवल वाहन चालकों तक सीमित नहीं है। बाजारों में खरीदारी करने पहुंचे परिवारों और मां दुर्गा के दर्शन के लिए निकले श्रद्धालुओं को भी भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। कई स्थानों पर वाहनों के फुटपाथ तक पहुंच जाने से पैदल चलने वालों के लिए जगह कम पड़ गई है।
छोटे बच्चों को गोद में लेकर चल रही महिलाओं और बुजुर्गों को भीड़ के बीच से निकलने में दिक्कत हो रही है। त्योहार के उल्लास के बीच लोग यातायात की अव्यवस्था से परेशान दिखाई दे रहे हैं। जाम के कारण एंबुलेंस और फायर ब्रिगेड जैसे आपातकालीन वाहनों की आवाजाही भी प्रभावित हो रही है।
चौराहों पर यातायात प्रबंधन को लेकर उठे सवाल
नवरात्र के दौरान हर साल बड़ी संख्या में श्रद्धालु और खरीदार शहर के प्रमुख बाजारों में पहुंचते हैं। इसके बावजूद इस बार भी कई व्यस्त मार्गों पर जाम की स्थिति बनने से यातायात प्रबंधन पर सवाल उठ रहे हैं। नागरिकों का आरोप है कि प्रमुख चौराहों और संवेदनशील मार्गों पर पर्याप्त पुलिस बल की तैनाती दिखाई नहीं दे रही है। लोगों का कहना है कि जब नवरात्र के दौरान भीड़ बढ़ने का अनुमान पहले से रहता है, तो यातायात पुलिस और संबंधित विभागों को पहले से तैयारी करनी चाहिए थी।
अस्थायी पार्किंग और रूट डायवर्जन की जरूरत
शहर में नवरात्र के दौरान यातायात व्यवस्था को सुचारु बनाए रखने के लिए प्रमुख पूजा पंडालों और झांकी स्थलों के आसपास नो-पार्किंग क्षेत्र चिह्नित करने की जरूरत है। इसके साथ ही खाली मैदानों में अस्थायी पार्किंग की व्यवस्था की जा सकती है, ताकि वाहन मुख्य सड़कों पर खड़े न हों।
व्यस्त बाजारों और प्रमुख मार्गों के लिए रूट डायवर्जन प्लान तैयार कर उसे समय रहते सार्वजनिक करना भी जरूरी है। इससे श्रद्धालुओं और आम नागरिकों को वैकल्पिक मार्गों की जानकारी मिल सकेगी और मुख्य सड़कों पर वाहनों का दबाव कम किया जा सकेगा।
नवरात्र जैसे बड़े धार्मिक आयोजन शहर की यातायात व्यवस्था के लिए हर साल चुनौती बनते हैं। ऐसे में बेहतर योजना, पर्याप्त पुलिस बल की तैनाती और पार्किंग की समुचित व्यवस्था से ही लोगों को घंटों जाम में फंसने से राहत मिल सकती है।
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