दैनिक सांध्य बन्धु (एजेंसी) नई दिल्ली। केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने रविवार को बांग्लादेश और फ्रांस में हुई हिंसक घटनाओं का हवाला देते हुए आरोप लगाया कि भारत में भी इसी तरह की साजिश रचने की कोशिश की गई। उन्होंने कहा कि कुछ नेताओं ने युवाओं को भड़काकर सड़कों पर हिंसा फैलाने का प्रयास किया, लेकिन भारत की लोकतांत्रिक व्यवस्था को इस तरह की कोशिशों से कमजोर नहीं किया जा सकता।
रिजिजू ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट के साथ वीडियो साझा करते हुए कहा, "भारत न तो बांग्लादेश है और न ही फ्रांस। भारत में सत्ता परिवर्तन बिल्कुल हो सकता है, लेकिन सिर्फ चुनावों के जरिए, सोरोस के जरिए नहीं।" उनका यह बयान सामाजिक कार्यकर्ता नेहा बोरा के उस वीडियो के बाद आया है, जिसमें उन्होंने भारत के जेन-जी आंदोलन को बांग्लादेश में हुए आंदोलन से प्रेरित बताया था।
नेहा बोरा ने बांग्लादेश के छात्र संगठन को भेजा था संदेश
नेहा बोरा ने बांग्लादेश के सोशलिस्ट स्टूडेंट्स फ्रंट (SSF) के छठे केंद्रीय सम्मेलन के लिए वीडियो संदेश भेजा था। इसमें उन्होंने कहा था कि भारत में चल रहा जेन-जी आंदोलन बांग्लादेश में शुरू हुए आंदोलन से प्रेरित है। उन्होंने बांग्लादेश के युवाओं को रास्ता दिखाने के लिए धन्यवाद भी दिया।
अपने संदेश में बोरा ने दावा किया कि बांग्लादेश में आंदोलन लोकतंत्र और मतदाताओं के अधिकारों की रक्षा के लिए शुरू हुआ था और भारत में युवा भी इसी तरह की लड़ाई लड़ रहे हैं। उन्होंने शिक्षा के निजीकरण, शिक्षण संस्थानों में कथित भगवाकरण और छात्रों के अधिकारों पर प्रतिबंधों को लेकर भी सवाल उठाए।
भाजपा ने राहुल गांधी पर लगाए गंभीर आरोप
भाजपा नेता प्रदीप भंडारी ने भी नेहा बोरा के बयान की आलोचना की। उन्होंने आरोप लगाया कि बांग्लादेश में भीड़ के जरिए अराजकता फैलाकर सत्ता परिवर्तन की कोशिश की गई और भारत में भी इसी तरह का आंदोलन खड़ा करने का प्रयास हो रहा है।
भंडारी ने राहुल गांधी पर निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि लोकतांत्रिक तरीकों से सत्ता हासिल करने में विफल रहने के बाद विपक्षी तंत्र अराजकता को बढ़ावा देने की कोशिश कर रहा है। भाजपा ने इसे लोकतांत्रिक व्यवस्था को कमजोर करने की साजिश बताया है। हालांकि, ये आरोप भाजपा नेताओं के राजनीतिक बयान हैं।
NEET पेपर लीक और SIR विरोध प्रदर्शनों में भी सक्रिय रहीं बोरा
नेहा बोरा इस साल NEET पेपर लीक के मुद्दे पर हुए प्रदर्शनों के दौरान चर्चा में आई थीं। इन प्रदर्शनों में शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग की गई थी। वह दिल्ली के जंतर-मंतर पर सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक के साथ अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल में भी शामिल हुई थीं।
अक्टूबर में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) में कथित गड़बड़ियों और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर हुए प्रदर्शनों में भी उनकी सक्रियता सामने आई। 10 अक्टूबर को दिल्ली में प्रदर्शन के दौरान पुलिस ने उन्हें हिरासत में लिया था। इस दौरान उनका एक वीडियो भी सोशल मीडिया पर वायरल हुआ, जिसमें उन्होंने कहा था, "मैं हिरासत में हूं, आंदोलन नहीं।"
राहुल गांधी के साथ मार्च में दिखीं थीं बोरा
12 अक्टूबर को दिल्ली में INDIA ब्लॉक के मार्च के दौरान नेहा बोरा राहुल गांधी और प्रियंका गांधी वाड्रा के साथ आगे की पंक्ति में नजर आई थीं। इसके अगले दिन वह राहुल गांधी के आवास पर आयोजित चाय बैठक में भी शामिल हुईं। इस बैठक में विपक्षी दलों, छात्र संगठनों और सिविल सोसायटी के प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया था।
नेहा बोरा के बांग्लादेश के आंदोलन से जुड़े बयान के बाद भाजपा और विपक्ष के बीच राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप तेज हो गए हैं। इस पूरे विवाद के केंद्र में भारत में युवाओं के आंदोलनों की दिशा, लोकतांत्रिक विरोध के तरीके और सत्ता परिवर्तन की संवैधानिक प्रक्रिया को लेकर बहस छिड़ गई है।
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