ड्राफ्ट वोटर लिस्ट में नाम नहीं तो भरें फॉर्म-6, दोबारा जुड़ जाएगा नाम; चुनाव आयोग ने दूर किया गिरफ्तारी और केस का डर

दैनिक संम्ध्य बन्धु (एजेंसी) नई दिल्ली। स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) के दौरान यदि किसी मतदाता का नाम ड्राफ्ट वोटर लिस्ट से कट गया है, तो उसे दोबारा जुड़वाने का मौका मिलेगा। इसके लिए संबंधित मतदाता को फॉर्म-6 भरकर आवेदन करना होगा। चुनाव आयोग ने स्पष्ट किया है कि भले ही कोई व्यक्ति पिछले 10 वर्षों से मतदाता के रूप में पंजीकृत हो, लेकिन ड्राफ्ट सूची में नाम नहीं होने पर उसे दोबारा नाम जुड़वाने के लिए फॉर्म-6 ही भरना होगा। ऐसा करने पर उसके खिलाफ झूठा शपथ पत्र देने का मामला दर्ज नहीं किया जाएगा और न ही कोई कानूनी कार्रवाई होगी।

दरअसल, फॉर्म-6 में एक घोषणा करनी होती है कि आवेदक का नाम पहली बार मतदाता सूची में शामिल किया जा रहा है। इस प्रावधान को लेकर पहले से पंजीकृत मतदाताओं के बीच भ्रम की स्थिति थी। उन्हें आशंका थी कि पुराना मतदाता होने के बावजूद पहली बार नाम जुड़वाने की घोषणा करना गलत जानकारी देना माना जा सकता है और जनप्रतिनिधित्व अधिनियम, 1950 की धारा 31 के तहत कार्रवाई हो सकती है। इसी आशंका के चलते कई लोग आवेदन करने से बच रहे थे। चुनाव आयोग ने अब इस भ्रम को दूर करते हुए स्पष्ट कर दिया है कि SIR में नाम कटने के बाद फॉर्म-6 भरना झूठा शपथ पत्र नहीं माना जाएगा।

आंकड़ों के मुताबिक, वर्ष 2025-26 में बिहार, दिल्ली समेत 30 राज्यों में SIR प्रक्रिया के दौरान 13 करोड़ से अधिक नाम ड्राफ्ट मतदाता सूची से हटाए गए हैं। दिल्ली में ही करीब 1.45 करोड़ मतदाताओं में से 47 लाख नाम सूची से बाहर हुए हैं। ऐसे में आयोग की इस सफाई से उन मतदाताओं को राहत मिलेगी, जिनके नाम ड्राफ्ट सूची में शामिल नहीं हैं।

ऐसे दोबारा जुड़वा सकते हैं नाम

मतदाता सबसे पहले चुनाव आयोग की आधिकारिक वेबसाइट voters.eci.gov.in पर जाकर अपने EPIC नंबर के जरिए नाम की स्थिति जांच सकते हैं। यदि ड्राफ्ट सूची में नाम नहीं मिलता है, तो फॉर्म-6 भरकर आवश्यक घोषणा और दस्तावेजों के साथ आवेदन करना होगा। इसके अलावा बूथ लेवल ऑफिसर (BLO) भी घर-घर जाकर फॉर्म भरवाने में मदद कर रहे हैं।

दस्तावेजों को लेकर आयोग के दिशा-निर्देशों के अनुसार, 1987 से पहले जन्मे आवेदकों को अपना एक दस्तावेज देना होगा। वहीं, 1987 से 2004 के बीच जन्मे लोगों को अपने साथ माता या पिता में से किसी एक का दस्तावेज देना होगा। 2004 के बाद जन्मे आवेदकों को स्वयं के साथ माता-पिता दोनों के दस्तावेज प्रस्तुत करने होंगे।

फॉर्म-6 से 2003 की वोटर लिस्ट का ब्योरा भी हटाया

चुनाव आयोग ने SIR प्रक्रिया पूरी कर चुके राज्यों के लिए फॉर्म-6 में एक और महत्वपूर्ण बदलाव किया है। अक्टूबर में किए गए संशोधन के बाद अब दोबारा नाम जुड़वाने के लिए आवेदक को वर्ष 2003 की मतदाता सूची से संबंधित जानकारी देने की अनिवार्यता हटा दी गई है। अब यह बताना जरूरी नहीं होगा कि आवेदक, उसके माता-पिता या दादा-दादी का नाम वर्ष 2003 की मतदाता सूची में दर्ज था या नहीं। इससे संबंधित अतिरिक्त घोषणा-पत्र भी फॉर्म-6 से हटा दिया गया है।

चुनाव आयोग के इस फैसले से SIR के दौरान नाम कटने के बाद दोबारा मतदाता सूची में शामिल होने की प्रक्रिया आसान होने की उम्मीद है। आयोग ने मतदाताओं से अपील की है कि वे किसी भी तरह के भ्रम या कानूनी कार्रवाई की आशंका के बिना निर्धारित प्रक्रिया के तहत अपना आवेदन करें।

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