दैनिक सांध्य बन्धु जबलपुर। मदन महल स्टेशन के तत्काल टिकट रिजर्वेशन काउंटर पर दलालों का पूरा कब्जा है। स्टेशन पर चार रिजर्वेशन काउंटर बने हुए हैं, जिनमें से एक काउंटर तत्काल टिकट के लिए सुबह 8:30 से 9:00 बजे तक खुलता है। लेकिन इस समयावधि में दलालों के एजेंटों की लिस्ट पहले से तैयार होती है, जिसमें उनके नाम लिखे होते हैं। जब आम यात्री काउंटर पर पहुंचता है, तो उसे इस लिस्ट में अपना नाम लिखने को कहा जाता है।
एजेंटों का खेल और यात्रियों की मजबूरी:
जैसे ही यात्री अपना नाम लिस्ट में लिख देता है, दलाल उसे बताते हैं कि उसका नंबर काफी पीछे है, जिससे उसे टिकट मिलने की संभावना नहीं है। मजबूरन यात्री 200 से 500 रुपये देकर एजेंटों से अपना फॉर्म भरवाकर टोकन लेता है। इस पूरे खेल में करीब 5 से 6 दलाल सक्रिय रहते हैं, जो अपनी संतों के माध्यम से यह काम करवा रहे हैं।
आपत्ति उठाने पर अभद्रता:
अगर कोई यात्री इस पर आपत्ति जताता है, तो एजेंटों द्वारा उससे अभद्रता की जाती है। महिला या पुरुष यात्रियों को चुप करा दिया जाता है। अगर कोई यात्री विरोध करने की हिम्मत करता है, तो दलाल उसे पहले टोकन लेने की पेशकश करते हैं।
एजेंटों की चालाकी और पहचान छिपाने की कोशिश:
दलाल अपने एजेंटों को हर दो-चार दिन में बदलते रहते हैं ताकि उनकी पहचान न हो सके। अगर रेलवे विजिलेंस या आरपीएफ द्वारा कोई कार्रवाई की जाती है, तो उन्हें पहले ही खबर मिल जाती है, और वे अपना ठिकाना बदलकर तिलवारा या गौरीघाट स्टेशन चले जाते हैं।
आरपीएफ और जीआरपी का संरक्षण:
कुछ यात्रियों का कहना है कि अगर एजेंटों से बहस की जाए, तो जीआरपी और आरपीएफ के अधिकारी उल्टा यात्रियों को ही नियम का पालन करने की नसीहत देते हैं। हालांकि, रेलवे के नियमों के अनुसार, काउंटर के बाहर बनी किसी भी लिस्ट को मान्यता नहीं दी जानी चाहिए, लेकिन वास्तविकता इससे विपरीत है।
.png)