दैनिक सांध्य बन्धु जबलपुर। मध्यप्रदेश हाईकोर्ट में बुधवार को नर्सिंग मान्यता फर्जीवाड़े मामले में जनहित याचिका और अन्य संबंधित याचिकाओं पर सुनवाई हुई। इस दौरान पीपुल्स यूनिवर्सिटी भोपाल और अरविंदो मेडिकल यूनिवर्सिटी द्वारा सत्र 2023-24 की मान्यता की मांग को लेकर दाखिल याचिका पर भी विचार किया गया। निजी विश्वविद्यालयों ने याचिका में कहा कि कोर्ट केस और सीबीआई जांच के चलते उन्हें सत्र 2023-24 की मान्यता नहीं मिल पाई है, जिससे उन्हें नुकसान उठाना पड़ रहा है।
कोर्ट के समक्ष याचिकाकर्ता ने बताया कि सत्र 2023-24 के लिए इंडियन नर्सिंग काउंसिल (आईएनसी) द्वारा घोषित कटऑफ डेट निकल चुकी है, और सत्र 2024-25 की मान्यता प्रक्रिया सितंबर में पूरी की जानी है। हाईकोर्ट ने पिछले आदेश में आईएनसी को यह स्पष्ट करने का निर्देश दिया था कि क्या सत्र 2023-24 की प्रवेश की कटऑफ डेट बढ़ाई जा सकती है। आज की सुनवाई में आईएनसी ने मौखिक रूप से बताया कि सर्वोच्च न्यायालय के दिशा-निर्देशों और सत्र 2024-25 की मान्यता प्रक्रिया शुरू होने के कारण सत्र 2023-24 की कटऑफ डेट नहीं बढ़ाई जा सकती है।
हाईकोर्ट ने आईएनसी को इस जवाब को लिखित में प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं। उल्लेखनीय है कि प्रदेश में नर्सिंग फर्जीवाड़े के कारण चल रही सीबीआई जांच के चलते पिछले तीन साल से परीक्षाएं और मान्यता प्रक्रिया प्रभावित हुई हैं, और 66 कॉलेजों की मान्यता रद्द की गई है। इसके अलावा, सरकार ने सरकारी नर्सिंग कॉलेजों के सत्र 2023-24 को शून्य घोषित कर दिया था, लेकिन कई निजी कॉलेजों ने बिना मान्यता के ही प्रवेश लिए हैं, जिससे प्रदेश के करीब डेढ़ लाख छात्रों की परीक्षा प्रभावित हो सकती है।
