दैनिक सांध्य बन्धु जबलपुर। मध्यप्रदेश राज्य सूचना आयोग पिछले पांच महीनों से पूरी तरह बंद है, जिसके कारण हजारों अपीलों का निराकरण नहीं हो पा रहा है। इसी मामले में जबलपुर हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को नोटिस जारी कर तीन सप्ताह के अंदर जवाब देने के निर्देश दिए हैं।
जबलपुर के अधिवक्ता विशाल बघेल ने 8 अगस्त 2022 को जबलपुर के एक निजी अस्पताल में हुए अग्निकांड की जांच से संबंधित दस्तावेजों के लिए सूचना के अधिकार अधिनियम, 2005 की धारा 6(1) के तहत 13 जून 2023 को मंत्रालय में आवेदन दाखिल किया था। जब उन्हें कोई जानकारी नहीं मिली, तो उन्होंने 28 जुलाई 2023 को प्रथम अपील और 21 सितंबर 2023 को द्वितीय अपील राज्य सूचना आयोग में दाखिल की। आयोग में पिछले एक साल से उनकी अपील का निराकरण नहीं हुआ है।
अधिवक्ता विशाल बघेल ने अपनी याचिका में बताया कि मध्यप्रदेश राज्य सूचना आयोग में वर्तमान में एक भी सूचना आयुक्त कार्यरत नहीं है, जिसके कारण आयोग का कामकाज पिछले पांच महीनों से ठप पड़ा हुआ है और हजारों अपीलें लंबित हैं। राज्य सूचना आयोग में सूचना आयुक्तों के 10 पद स्वीकृत हैं, लेकिन सभी पद खाली हैं।
मध्यप्रदेश हाईकोर्ट के जस्टिस विशाल धगट की एकल पीठ ने राज्य सरकार को तीन सप्ताह के भीतर जवाब पेश करने के निर्देश दिए हैं। मामले की अगली सुनवाई 23 सितंबर को निर्धारित की गई है।
गौरतलब है कि सूचना आयुक्तों की नियुक्ति के लिए मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में गठित कमेटी जिम्मेदार होती है, जिसमें मुख्यमंत्री और नेता प्रतिपक्ष द्वारा नामित एक अन्य कैबिनेट मंत्री भी शामिल होते हैं। हालांकि, पिछले तीन वर्षों में राज्य सरकार ने सूचना आयुक्तों की नियुक्ति के लिए तीन बार विज्ञापन जारी किए, लेकिन अब तक कोई नियुक्ति नहीं की गई है।
