दैनिक सांध्य बन्धु जबलपुर। समरसता सेवा संगठन द्वारा आयोजित कजलियां महोत्सव ने जबलपुर में एक नया इतिहास रच दिया। इस महोत्सव में सर्व समाज की भागीदारी के साथ समरसता और सांप्रदायिक सद्भाव का संदेश दिया गया। मदन महल स्थित दद्दा परिसर के विशाल प्रांगण में आयोजित इस भव्य समारोह में विभिन्न संत-महंतों, प्रबुद्धजनों और समाज के हर वर्ग से उपस्थित लोगों ने एक-दूसरे को शुभकामनाएं दीं और समाज में एकता और समरसता की भावना को प्रबल किया।
जबलपुर ने रचा इतिहास
इस आयोजन को संबोधित करते हुए संतों ने कहा कि जबलपुर ने समरसता के इतिहास में एक नया अध्याय जोड़ा है। कजलियां-होली जैसे पर्वों को समरसता सेवा संगठन ने जिस तरह से पुनर्जीवित किया है, वह अद्वितीय है। इसके लिए संगठन की संयोजन टीम को विशेष रूप से बधाई दी गई।
संतों और प्रबुद्धजनों ने दी शुभकामनाएं
महोत्सव में जगतगुरू सुखानंद द्वाराचार्य स्वामी राघव देवाचार्यजी, महामंडलेश्वर स्वामी अखिलेश्वरानंद जी समेत कई संतों ने अपनी उपस्थिति दर्ज कराई। साथ ही, प्रदेश के मंत्री, सांसद, विधायक और अन्य गणमान्य हस्तियों ने भी आयोजन में भाग लिया।
कई संगठनों की सहभागिता
इस महोत्सव में जबलपुर के सैकड़ों सामाजिक संगठनों, व्यापारिक, सांस्कृतिक और शैक्षणिक संस्थाओं ने सक्रिय रूप से भाग लिया। संगठनों के प्रतिनिधियों ने नागपंचमी के अवसर पर बोई गई कजली लेकर कजलियां पूजन में हिस्सा लिया और एक-दूसरे को शुभकामनाएं दीं।
पारंपरिक गीत-संगीत ने मोहा मन
महोत्सव में मां नर्मदा अष्टक, कजरी, आल्हा और लोकगीत गायन सहित पारंपरिक संगीत की मनमोहक प्रस्तुतियां दी गईं।
कजलियां भोज का अनूठा जायका
महोत्सव में विभिन्न समाजों द्वारा पारंपरिक खाद्य पदार्थों की व्यवस्था की गई, जिसमें गुड़ की जलेबी, मोटे सेव, बेढ़नी पूड़ी, छोला पुलाव, खांडवी, दाल पकवान और साबुदाना खिचड़ी जैसी विविधता देखने को मिली।
बच्चों-महिलाओं की प्रतियोगिता
महोत्सव के दौरान बच्चों और महिलाओं के लिए विभिन्न प्रतियोगिताओं का आयोजन भी किया गया, जिसमें 'सामाजिक समरसता में कजलिया पर्व की महत्ता' पर निबंध, हस्त निर्मित राखी और पूजा थाली सजाओ प्रतियोगिता शामिल थीं।
चाइल्ड जोन का बाल आनंद
इस महोत्सव में बच्चों के लिए विशेष रूप से चाइल्ड जोन की व्यवस्था की गई, जिसमें झूलों और अन्य खेलकूद के माध्यम से बच्चों ने आनंद लिया।
कुश जयंती का आयोजन
महोत्सव के दौरान भगवान कुश की जयंती भी मनाई गई और इसके महत्व पर प्रकाश डाला गया।
महोत्सव के समापन पर धन्यवाद ज्ञापन संगठन के सचिव उज्ज्वल पचौरी द्वारा किया गया। इस आयोजन ने जबलपुर में समरसता और सांप्रदायिक सद्भाव का नया उदाहरण पेश किया।
