दैनिक सांध्य बन्धु जबलपुर। 21 सितंबर को जबलपुर हाईकोर्ट में मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान, भाजपा प्रदेश अध्यक्ष विष्णुदत्त शर्मा और पूर्व मंत्री भूपेंद्र सिंह के खिलाफ कांग्रेस नेता विवेक तन्खा द्वारा दायर मानहानि मामले की सुनवाई हुई। इस दौरान वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल ने तन्खा का पक्ष रखा।
विवेक तन्खा ने आरोप लगाया है कि चौहान, शर्मा और सिंह ने सार्वजनिक रूप से उन पर गंभीर आरोप लगाए, जिससे उनकी छवि धूमिल हुई। तन्खा ने इन बयानों को मानहानि मानते हुए 10 करोड़ रुपये का दावा किया है।
सिब्बल ने कोर्ट में कहा कि यह मामला केवल राजनीतिक विवाद नहीं है, बल्कि तन्खा की पेशेवर प्रतिष्ठा से जुड़ा है। उन्होंने तन्खा की कानूनी साख को प्रभावित करने वाले बयानों का जिक्र किया और कहा कि यह झूठी बयानबाजी स्वीकार नहीं की जा सकती।
सिब्बल ने बताया कि 19 दिसंबर को आरोपियों को नोटिस भेजा गया था, लेकिन कोई जवाब नहीं आया। कोर्ट में आरोपियों ने कहा कि मीडिया में छपी खबर उनके बयान का सही प्रतिनिधित्व नहीं करती।
तन्खा ने मध्य प्रदेश में पंचायत और निकाय चुनाव में ओबीसी आरक्षण पर रोक के मामले में सुप्रीम कोर्ट में पैरवी की थी। उनका आरोप है कि भाजपा नेताओं ने उनके खिलाफ गलत बयानों का उपयोग किया, जिससे उनकी छवि प्रभावित हुई।
एमपी-एमएलए कोर्ट ने पहले ही तीनों नेताओं के खिलाफ जमानती वारंट जारी किया था, जिसे चुनौती देते हुए उन्होंने हाईकोर्ट में याचिका दायर की। हाईकोर्ट ने वारंट पर अंतरिम रोक लगा दी है। अब इस मामले में सुनवाई के बाद कोर्ट ने आदेश सुरक्षित रख लिया है।
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