नई दिल्ली। भारत ने एक बार फिर वैश्विक मंच पर डिजिटल नवाचार और समावेशी आर्थिक विकास के क्षेत्र में ऐतिहासिक मुकाम हासिल किया है। अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) की ताज़ा रिपोर्ट के अनुसार, भारत अब दुनिया में सबसे ज़्यादा ऑनलाइन ट्रांजेक्शन करने वाला देश बन गया है। रिपोर्ट का शीर्षक"बढ़ते खुदरा डिजिटल भुगतान: अंतर-संचालनीयता का मूल्य"इस बात की तस्दीक करता है कि भारत, विशेष रूप से यूपीआई (Unified Payments Interface) के जरिए, डिजिटल फाइनेंशियल इन्फ्रास्ट्रक्चर में ग्लोबल लीडर बन चुका है।
हर महीने 18 अरब से अधिक ट्रांजैक्शन
आईएमएफ रिपोर्ट के अनुसार, भारत में हर महीने 18 अरब से अधिक डिजिटल लेन-देन सिर्फ UPI के माध्यम से किए जा रहे हैं। यह आंकड़ा न केवल भारत की तकनीकी प्रगति को दर्शाता है, बल्कि देश के आर्थिक व्यवहार में डिजिटल अपनत्व की गहराई को भी उजागर करता है।
32% की वार्षिक वृद्धि, 85% डिजिटल लेनदेन में UPI की हिस्सेदारी
रिपोर्ट में बताया गया कि जून 2024 में UPI से 18.39 अरब लेन-देन दर्ज किए गए, जो पिछले वर्ष जून 2023 के 13.88 अरब ट्रांजैक्शनों की तुलना में 32 प्रतिशत की अभूतपूर्व वृद्धि है। आज 491 मिलियन (49 करोड़) लोग और 65 मिलियन (6.5 करोड़) व्यापारी UPI से जुड़े हुए हैं।
भारत में कुल डिजिटल लेन-देन का 85 प्रतिशत हिस्सा अब UPI के माध्यम से होता है, जबकि यह दुनिया भर में हो रहे रीयल-टाइम डिजिटल भुगतानों का लगभग 50 प्रतिशत कवर करता है।
सीमाओं से परे यूपीआई का प्रभाव
यूपीआई अब भारत तक सीमित नहीं रहा। यह सिंगापुर, भूटान, नेपाल, श्रीलंका, संयुक्त अरब अमीरात, फ्रांस और मॉरीशस जैसे देशों में भी स्वीकार्य है। हाल ही में फ्रांस में भी इसकी शुरुआत हुई है, जिससे वहां रहने या घूमने गए भारतीय नागरिकों को बिना किसी मुद्रा-परिवर्तन झंझट के डिजिटल पेमेंट की सुविधा मिल रही है।
ग्लोबल मॉडल बना भारत का फिनटेक
विशेषज्ञों का मानना है कि भारत का UPI मॉडल अब वैश्विक डिजिटल भुगतान संरचना के लिए एक रोडमैप बन चुका है। IMF जैसे अंतरराष्ट्रीय मंच द्वारा की गई यह मान्यता 'डिजिटल इंडिया' पहल की ठोस सफलता का प्रमाण है।