दैनिक सांध्य बन्धु ( एजेंसी ) सिंगरौली। सिंगरौली जिले के छत्तीसगढ़ बॉर्डर से लगे बारहपन गांव से सामने आया एक वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है, जिसमें 11 वर्षीय आदिवासी दिव्यांग बच्ची दिल कुमारी बैगा घुटनों के बल चलते हुए सिर पर लकड़ियों का गट्ठा ढोती नजर आ रही है। यह दृश्य न सिर्फ इंसानियत को झकझोरने वाला है, बल्कि सिस्टम की जमीनी हकीकत भी उजागर करता है।
जांच में सामने आया कि दिल कुमारी तीसरी कक्षा की छात्रा है और जन्म से ही दोनों पैरों से दिव्यांग है। वह अपने नाना राम ब्रिज बैगा और नानी सोनमती बैगा के साथ रहती है। गरीबी और संसाधनों के अभाव के चलते बच्ची की मां उसकी देखभाल नहीं कर सकी, जिसके बाद नाना-नानी ने ही उसकी परवरिश की जिम्मेदारी संभाली। ठंड के मौसम में नाना-नानी की परेशानी देखकर बच्ची खुद जंगल से लकड़ी लेने निकल पड़ी और घुटनों के बल चलकर लकड़ियां ढोती नजर आई।
वीडियो को लेकर उठे सवालों पर नाना भावुक हो गए। उन्होंने कहा कि उन्होंने कभी बच्ची से लकड़ी लाने को नहीं कहा। संभवतः ठंड में आग जलाने की जरूरत सोचकर वह खुद ही निकल गई। नाना ने यह भी बताया कि उन्होंने कई बार पंचायत और जनप्रतिनिधियों से मदद की गुहार लगाई, लेकिन अब तक कोई ठोस सहायता नहीं मिल पाई थी।
वीडियो वायरल होने के बाद कांग्रेस नेता सूर्य द्विवेदी सहित कई लोग गांव पहुंचे और बच्ची की मदद का भरोसा दिलाया। उन्होंने कहा कि केवल सोशल मीडिया पर वीडियो साझा करना काफी नहीं है, ज़रूरत ज़मीनी मदद की है। उन्होंने प्रशासन से हस्तक्षेप की मांग की और कहा कि यदि शासन स्तर पर सहायता नहीं मिली तो वे स्वयं सहयोग करेंगे।मामला सामने आने के बाद प्रशासन भी सक्रिय हुआ। बच्ची और उसके परिजनों को जिला मुख्यालय बुलाया गया, जहां रेड क्रॉस सोसाइटी के माध्यम से उसे ट्राइसिकल प्रदान की गई। जिला पंचायत के एडिशनल सीईओ आईबी डामोर ने बताया कि बच्ची का स्वास्थ्य परीक्षण कराया जा रहा है और उसकी दिव्यांगता को देखते हुए संभावित इलाज व ऑपरेशन की व्यवस्था की जा रही है। साथ ही, शासन की सभी पात्र योजनाओं का लाभ दिल कुमारी को दिलाया जाएगा।
घुटनों के बल लकड़ियां ढोती इस मासूम की तस्वीरें आज भी सवाल पूछ रही हैं—क्या मदद के लिए हर बार किसी वीडियो का वायरल होना जरूरी है?
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