दैनिक सांध्य बन्धु जबलपुर। नगर निगम में चेहरा पहचान आधारित ई-अटेंडेंस लागू होने के बाद नगर निगम के लगभग 1500 कर्मचारी गायब पाए गए हैं। निगम के स्थापना विभाग में कुल 7200 अधिकारी-कर्मचारी पंजीकृत हैं, लेकिन औसतन केवल 5700 कर्मचारी ही ई-अटेंडेंस लगा रहे हैं। इनमें अधिकांश आउटसोर्स कर्मचारी बताए जा रहे हैं। इससे यह आशंका पैदा हो रही है कि इन कर्मचारियों के नाम पर नगर निगम हर माह करीब डेढ़ करोड़ रुपये का वेतन फर्जी तौर पर भुगतान करता रहा है।
नगर निगम ने इस व्यवस्था के तहत अब केवल वही कर्मचारियों का वेतन भुगतान कर रहा है, जिन्होंने वास्तविक रूप से ई-अटेंडेंस लगाई है। तकनीकी अधिकारियों के अनुसार, पहले भी कई फर्जी कर्मचारियों का मामला सामने आ चुका था, जिनके नाम से वेतन निकलता रहा, जबकि वे कार्यालय में उपस्थित नहीं थे। नगर निगम में नियमित और संविदा कर्मचारियों की संख्या 2504 है, जबकि लगभग 4500 आउटसोर्स कर्मचारी भी पंजीकृत हैं।
निगम में हर माह बिजली, पानी, वेतन, पेंशन, भत्ते, वाहन किराया और डीजल सहित करीब 30 करोड़ रुपये खर्च होते हैं। ई-अटेंडेंस के लागू होने के बाद अब वास्तविक रूप से काम करने वाले कर्मचारियों की उपस्थिति सुनिश्चित की जा रही है और जिनकी उपस्थिति नहीं है, उनका वेतन रोका जा रहा है। अपर आयुक्त अरविंद शाह ने बताया कि इस प्रणाली से नगर निगम में लंबे समय से चल रहे फर्जीवाड़े का पर्दाफाश हुआ है।
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