दैनिक सांध्य बन्धु जबलपुर। नायलोन धागा यानी चाइनीज मांझा भले ही सरकारी आदेशों और हाईकोर्ट के निर्देशों में पूरी तरह प्रतिबंधित हो, लेकिन जमीनी हकीकत इससे बिल्कुल उलट नजर आ रही है। प्रशासन और सरकार की तमाम कोशिशों के बावजूद न तो इसके निर्माण पर प्रभावी रोक लग पा रही है और न ही इसकी बिक्री पर। हालात यह हैं कि मौत का यह मांझा खुलेआम बिक रहा है और धड़ल्ले से इस्तेमाल भी किया जा रहा है।
बीते एक वर्ष में ही जिले में एक दर्जन से अधिक छोटी-बड़ी घटनाएं चाइनीज मांझे से हो चुकी हैं। कहीं लोग गंभीर रूप से घायल हुए, तो कहीं परिवारों ने अपने घर के चिराग खो दिए। इसके बावजूद प्रशासनिक कार्रवाई घटना के बाद ही सक्रिय होती नजर आती है, जिससे सवाल उठ रहे हैं कि आखिर किसकी शह पर यह जानलेवा धागा बाजार तक पहुंच रहा है।
घटना होती है, तब जागता है अमला
जमीनी सच्चाई यह है कि जब भी कोई हादसा सामने आता है, तब कलेक्टर के आदेश पर अभियान चलाया जाता है। कुछ दुकानों पर दबिश, कुछ चरखियों की जब्ती और फिर मामला ठंडे बस्ते में चला जाता है। जब तक निर्माण से लेकर सप्लाई चैन तक पर सख्त प्रतिबंध और सतत निगरानी नहीं होगी, तब तक इस समस्या का स्थायी समाधान संभव नहीं है।
प्रशासन की आंखों के सामने बिक रहा मौत का मांझा
स्थिति यह है कि पुलिस और प्रशासन की मौजूदगी में भी चाइनीज मांझा बिक रहा है और पतंगबाजी में उपयोग किया जा रहा है। जब तक कार्रवाई होती है, तब तक यह मांझा दुकानों से निकलकर घरों और छतों तक पहुंच चुका होता है। इसका खामियाजा आम नागरिकों, दोपहिया वाहन चालकों और मूक पशु-पक्षियों को भुगतना पड़ रहा है।
मकर संक्रांति पर बढ़ता है खतरा
मकर संक्रांति के अवसर पर जब तिल-गुड़ की मिठास के साथ आसमान पतंगों से भर जाता है, तब यही मांझा खुशियों को पल भर में मातम में बदल देता है। पतंगबाजी का रोमांच कई बार जानलेवा साबित हो रहा है। संभाग के छिंदवाड़ा में गर्दन कटने से हुई मौत इसका ताजा उदाहरण है।
ऑनलाइन डिलीवरी से घर-घर पहुंच रहा मांझा
प्रतिबंध के बावजूद ऑनलाइन प्लेटफॉर्म के जरिए चाइनीज मांझे की डिलीवरी धड़ल्ले से हो रही है। आधुनिक व्यापार के इस नए तरीके ने प्रशासन की चुनौती और बढ़ा दी है। सवाल यह है कि ऑनलाइन माध्यमों पर इस “मौत के सामान” की बिक्री पर कड़ी कार्रवाई क्यों नहीं हो रही?
हाईकोर्ट के आदेशों की खुली अनदेखी
हाईकोर्ट ने चाइनीज मांझे के निर्माण, बिक्री और उपयोग पर पूर्ण प्रतिबंध लगाया है और इसके पालन की जिम्मेदारी कलेक्टर और एसपी को सौंपी है। इसके बावजूद प्रतिबंध का उल्लंघन लगातार जारी है। यह न सिर्फ मानव जीवन बल्कि पशु-पक्षियों के लिए भी गंभीर खतरा बना हुआ है। हर साल सैकड़ों पक्षियों की मौत का कारण भी यही चाइनीज मांझा बनता है।
बीते एक वर्ष में ही जिले में एक दर्जन से अधिक छोटी-बड़ी घटनाएं चाइनीज मांझे से हो चुकी हैं। कहीं लोग गंभीर रूप से घायल हुए, तो कहीं परिवारों ने अपने घर के चिराग खो दिए। इसके बावजूद प्रशासनिक कार्रवाई घटना के बाद ही सक्रिय होती नजर आती है, जिससे सवाल उठ रहे हैं कि आखिर किसकी शह पर यह जानलेवा धागा बाजार तक पहुंच रहा है।
घटना होती है, तब जागता है अमला
जमीनी सच्चाई यह है कि जब भी कोई हादसा सामने आता है, तब कलेक्टर के आदेश पर अभियान चलाया जाता है। कुछ दुकानों पर दबिश, कुछ चरखियों की जब्ती और फिर मामला ठंडे बस्ते में चला जाता है। जब तक निर्माण से लेकर सप्लाई चैन तक पर सख्त प्रतिबंध और सतत निगरानी नहीं होगी, तब तक इस समस्या का स्थायी समाधान संभव नहीं है।
प्रशासन की आंखों के सामने बिक रहा मौत का मांझा
स्थिति यह है कि पुलिस और प्रशासन की मौजूदगी में भी चाइनीज मांझा बिक रहा है और पतंगबाजी में उपयोग किया जा रहा है। जब तक कार्रवाई होती है, तब तक यह मांझा दुकानों से निकलकर घरों और छतों तक पहुंच चुका होता है। इसका खामियाजा आम नागरिकों, दोपहिया वाहन चालकों और मूक पशु-पक्षियों को भुगतना पड़ रहा है।
मकर संक्रांति पर बढ़ता है खतरा
मकर संक्रांति के अवसर पर जब तिल-गुड़ की मिठास के साथ आसमान पतंगों से भर जाता है, तब यही मांझा खुशियों को पल भर में मातम में बदल देता है। पतंगबाजी का रोमांच कई बार जानलेवा साबित हो रहा है। संभाग के छिंदवाड़ा में गर्दन कटने से हुई मौत इसका ताजा उदाहरण है।
ऑनलाइन डिलीवरी से घर-घर पहुंच रहा मांझा
प्रतिबंध के बावजूद ऑनलाइन प्लेटफॉर्म के जरिए चाइनीज मांझे की डिलीवरी धड़ल्ले से हो रही है। आधुनिक व्यापार के इस नए तरीके ने प्रशासन की चुनौती और बढ़ा दी है। सवाल यह है कि ऑनलाइन माध्यमों पर इस “मौत के सामान” की बिक्री पर कड़ी कार्रवाई क्यों नहीं हो रही?
हाईकोर्ट के आदेशों की खुली अनदेखी
हाईकोर्ट ने चाइनीज मांझे के निर्माण, बिक्री और उपयोग पर पूर्ण प्रतिबंध लगाया है और इसके पालन की जिम्मेदारी कलेक्टर और एसपी को सौंपी है। इसके बावजूद प्रतिबंध का उल्लंघन लगातार जारी है। यह न सिर्फ मानव जीवन बल्कि पशु-पक्षियों के लिए भी गंभीर खतरा बना हुआ है। हर साल सैकड़ों पक्षियों की मौत का कारण भी यही चाइनीज मांझा बनता है।
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