MP News: 9 साल से लापता नाबालिग, जांच अधिकारी कोर्ट में तलब

दैनिक सांध्य बन्धु (एजेंसी) ग्वालियर। ग्वालियर अंचल के गुना जिले से वर्ष 2017 में लापता हुई नाबालिग का अब तक कोई सुराग नहीं लग पाया है। करीब साढ़े आठ साल तक पुलिस द्वारा जांच किए जाने के बाद मामला सीबीआई को सौंपा गया था, लेकिन 13 महीने की जांच के बाद भी सीबीआई भी नाबालिग को तलाशने में असफल रही है। इससे आहत नाबालिग के पिता ने एक बार फिर हाईकोर्ट में आवेदन किया है।

हाईकोर्ट ने इस मामले को पुनः हैबियस कॉर्पस रिट के तहत सुनवाई के लिए स्वीकार किया है। कोर्ट ने सीबीआई के जांच अधिकारी को केस डायरी के साथ तलब करते हुए पूछा है कि अब तक नाबालिग की तलाश के लिए क्या-क्या प्रयास किए गए हैं। मामले की अगली सुनवाई 16 फरवरी को होगी।

संदिग्ध युवक से नहीं हुई प्रभावी पूछताछ

नाबालिग के पिता ने जितेंद्र प्रजापति नामक युवक की भूमिका पर संदेह जताया था, लेकिन पुलिस और सीबीआई दोनों ही उससे प्रभावी पूछताछ नहीं कर सकीं। इसको लेकर पिता ने कोर्ट में आपत्ति दर्ज कराई है।

सीबीआई पर गंभीरता से जांच न करने का आरोप

याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता अनिल श्रीवास्तव ने कोर्ट में दलील दी कि सीबीआई ने मामले की गंभीरता के अनुरूप जांच नहीं की, इसी कारण अब तक नाबालिग का पता नहीं चल सका। वहीं सीबीआई की ओर से अदालत को बताया गया कि स्टेटस रिपोर्ट पहले ही पेश की जा चुकी है और जांच के बाद अंतिम रिपोर्ट सक्षम न्यायालय में प्रस्तुत की जाएगी। इस पर कोर्ट ने अगली सुनवाई में केस डायरी प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं।

2017 में हुई थी नाबालिग लापता

गुना जिले के आरोन थाना क्षेत्र से 11 दिसंबर 2017 को 17 वर्षीय नाबालिग लापता हुई थी। काफी तलाश के बाद भी जब उसका पता नहीं चला, तो पिता ने उसी वर्ष हाईकोर्ट में बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका दायर की थी। मामला लंबे समय तक लंबित रहा। बाद में सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने नाराजगी जताते हुए ग्वालियर आईजी को व्यक्तिगत रूप से तलब किया था।

आईजी ने जांच के लिए एसआईटी गठित की, लेकिन एसआईटी भी नाबालिग को तलाशने में नाकाम रही। इसके बाद 17 दिसंबर 2024 को हाईकोर्ट ने मामला सीबीआई को सौंप दिया था। सीबीआई ने जांच के दौरान स्टेटस रिपोर्ट पेश की, लेकिन नाबालिग का कोई सुराग नहीं मिल सका। जांच पूरी करने के लिए सीबीआई ने छह महीने का अतिरिक्त समय भी लिया था।

नार्को टेस्ट भी रहे बेअसर

मामले में पुलिस ने संदिग्धों और नाबालिग के पिता का गुजरात में नार्को टेस्ट भी कराया था। पिता के बयान में सामने आया था कि उसने आखिरी बार बेटी को आरोन थाने में देखा था, इसके बाद वह कहीं नजर नहीं आई। अन्य संदिग्धों के भी नार्को टेस्ट कराए गए, लेकिन कोई ठोस सुराग हाथ नहीं लगा।

अब एक बार फिर हाईकोर्ट की सख्ती के बाद यह देखना होगा कि सीबीआई इस रहस्यमय मामले में कोई ठोस जानकारी जुटा पाती है या नहीं।

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