Jabalpur News: सराफा में पिता–पुत्र पर जानलेवा हमला कर जेवर लूटने वाले अंतर्राज्यीय गिरोह के दो आरोपी गिरफ्तार, 30 लाख का माल बरामद

दैनिक सांध्य बन्धु जबलपुर। थाना पनागर क्षेत्र अंतर्गत सराफा व्यवसायियों पर हुए सनसनीखेज लूटकांड का पुलिस ने बड़ा खुलासा करते हुए अंतर्राज्यीय गिरोह के दो शातिर आरोपियों को गिरफ्तार किया है। आरोपियों के कब्जे से नगदी सहित सोने-चांदी के कीमती जेवरात, कुल लगभग 30 लाख रुपये का माल, घटना में प्रयुक्त दो दुपहिया वाहन और एक मोबाइल फोन जब्त किया गया है। आरोपियों की गिरफ्तारी के बाद पुलिस द्वारा पनागर सराफा बाजार में जुलूस भी निकाला गया, जिससे व्यापारियों और आमजन में सुरक्षा का संदेश गया।

पुलिस के अनुसार यह कार्रवाई थाना पनागर अपराध क्रमांक 1350/2025, धारा 310(2), 109(1) बीएनएस के तहत की गई है।

गिरफ्तार आरोपी में दीपक त्रिपाठी पिता स्व. राजकुमार त्रिपाठी उम्र 39 वर्ष निवासी ग्राम छत्ता कापूर्वा थाना महेशगंज जिला प्रतापगढ़ (उ.प्र.) हाल निवासी गंगा नगर फाफामऊ प्रयागराज, गोविन्द पाण्डे उर्फ कान्हा पिता हरिश्चन्द्र पाण्डे उम्र 32 वर्ष निवासी ग्राम लक्षीपुर थाना रानीगंज जिला प्रतापगढ़ (उ.प्र.) हाल निवासी तेजबहादुर नगर नागपुर (महाराष्ट्र) शामिल हैं।

ये है पूरा मामला 

दिनांक 16 दिसंबर 2025 को थाना पनागर क्षेत्र के जयप्रकाश वार्ड में सोनिया ज्वेलर्स के पीछे वाली गली में लूट की सूचना पर पुलिस मौके पर पहुंची। सराफा व्यापारी सुशील उर्फ बल्लू सोनी ने बताया कि उनके बड़े भाई सुनील कुमार उर्फ भूरा सोनी, जो विद्यासागर वार्ड में भूरा ज्वेलर्स के नाम से दुकान संचालित करते हैं, अपने बेटे कान्हा (संभव) सोनी के साथ दुकान बंद कर सोने-चांदी के आभूषण चार थैलों में रखकर ओला स्कूटर से घर लौट रहे थे।

इसी दौरान गली में तीन मोटरसाइकिलों पर सवार छह बदमाशों ने कट्टे की नोक पर और हथौड़ी से हमला कर पिता-पुत्र के साथ बेरहमी से मारपीट की और तीन थैले लूटकर फरार हो गए। बदमाश दो काली और एक सफेद अपाचे मोटरसाइकिल से हाईवे की ओर भाग निकले।

मारपीट में सुनील सोनी के सिर, पीठ, कंधे और होंठ में गंभीर चोटें आईं, जबकि बेटे कान्हा सोनी के सिर और हाथ की उंगली में चोट तथा छोटे बेटे सक्षम के चेहरे पर खरोंच आई। घायलों को पहले सीएचसी पनागर और बाद में मेट्रो अस्पताल जबलपुर में भर्ती कराया गया।

प्रारंभिक जांच में लूटे गए आभूषणों की मात्रा लगभग 750 ग्राम सोना और 10–12 किलो चांदी बताई गई। पूछताछ में यह भी सामने आया कि लूट के दौरान एक आरोपी ने सुनील सोनी पर गोली चलाई, जिसके बाद प्रकरण में धारा 109(1) बीएनएस जोड़ी गई।

एसआईटी का गठन, अंतर्राज्यीय नेटवर्क का खुलासा


घटना की गंभीरता को देखते हुए पुलिस अधीक्षक सम्पत उपाध्याय (भा.पु.से.) के निर्देश पर अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक (शहर) आयुष गुप्ता, अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक (अपराध) जितेन्द्र सिंह के मार्गदर्शन में क्राइम ब्रांच एवं विभिन्न थानों की विशेष एसआईटी टीम गठित की गई।

मुखबिर की सूचना पर पता चला कि इस वारदात को उत्तर प्रदेश के प्रतापगढ़ जिले के अपराधियों ने अंजाम दिया है। गिरोह के सदस्य वीरेन्द्र यादव, दीपक त्रिपाठी, गोविन्द पाण्डे, रवि पासी, रंजीत यादव और सत्यम तिवारी हैं।

टीमों ने प्रयागराज और नागपुर में दबिश देकर दीपक त्रिपाठी और गोविन्द पाण्डे उर्फ कान्हा को गिरफ्तार कर पनागर लाया। कड़ी पूछताछ में आरोपियों ने स्वीकार किया कि उन्होंने पहले रेकी की थी और 14–15 दिसंबर को लूट की योजना बनाई थी, लेकिन डायल 112 के मौके पर पहुंचने से वारदात टाल दी गई। अगले दिन 16 दिसंबर को उन्होंने लूट को अंजाम दिया।

जंगल से बरामद हुआ लूटा गया माल


आरोपियों ने बताया कि लूट के बाद माल का आपस में बंटवारा कर इंद्राना के पास ग्राम बनखेड़ी, मनका पहाड़ी के जंगल में गड्ढे खोदकर आभूषण छिपा दिए गए थे। आरोपी दीपक त्रिपाठी की निशानदेही पर 98 ग्राम सोना, 1906 ग्राम चांदी, 1 लाख रुपये नगद और सुपर स्प्लेंडर मोटरसाइकिल, जबकि गोविन्द पाण्डे की निशानदेही पर 54 ग्राम सोना, 1104 ग्राम चांदी और अपाचे मोटरसाइकिल बरामद की गई।

अन्य आरोपी फरार, एक जेल में बंद

 
इस प्रकरण का एक आरोपी वीरेन्द्र यादव घटना के बाद प्रतापगढ़ के एक अन्य मामले में न्यायालय में सरेंडर कर चुका है और वर्तमान में जिला जेल प्रतापगढ़ में बंद है। उसका प्रोटेक्शन वारंट प्राप्त कर गिरफ्तारी की प्रक्रिया जारी है। अन्य आरोपी रवि पासी, सत्यम तिवारी और रंजीत यादव की तलाश के लिए पुलिस टीमें लगातार दबिश दे रही हैं।

पुलिस के अनुसार, गिरोह के सभी सदस्य अत्यंत खतरनाक और शातिर अपराधी हैं, जिनके खिलाफ उत्तर प्रदेश, मध्यप्रदेश और महाराष्ट्र में लूट, डकैती जैसे कई गंभीर मामले दर्ज हैं।

पुलिस टीम की सराहनीय भूमिका

इस बड़ी कार्रवाई में थाना प्रभारी पनागर विपिन ताम्रकार, क्राइम ब्रांच एवं विभिन्न थानों के अधिकारियों-कर्मचारियों, साइबर सेल और एसआईटी टीम के सदस्यों की महत्वपूर्ण और सराहनीय भूमिका रही।

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