सीएम सिद्धारमैया ने कहा कि बच्चों में मोबाइल और सोशल मीडिया का उपयोग तेजी से बढ़ रहा है, जिससे उनके मानसिक स्वास्थ्य और व्यवहार पर नकारात्मक प्रभाव पड़ रहा है। इसी को ध्यान में रखते हुए सरकार यह कदम उठा रही है। फिलहाल इस बैन को लागू करने के लिए नियम और प्रक्रिया तैयार की जा रही है।
माता-पिता की अनुमति और उम्र का वैरिफिकेशन होगा जरूरी
सरकार के प्रस्ताव के मुताबिक 16 साल से कम उम्र के बच्चों को सोशल मीडिया अकाउंट बनाने से पहले माता-पिता की अनुमति लेना अनिवार्य होगा। साथ ही उम्र का सत्यापन भी जरूरी किया जाएगा। इसके लिए सरकारी पहचान प्रणाली या डिजिटल लॉकर जैसी व्यवस्था का इस्तेमाल किया जा सकता है।
यह प्रस्ताव केंद्र सरकार के डिजिटल पर्सनल डेटा प्रोटेक्शन एक्ट 2023 और पर्सनल डेटा प्रोटेक्शन रूल्स 2025 से भी जुड़ा हुआ है, जिनमें बच्चों के डेटा और ऑनलाइन सुरक्षा को लेकर सख्त प्रावधान किए गए हैं।
कॉलेज-विश्वविद्यालयों में नशे के खिलाफ अभियान
सीएम सिद्धारमैया ने यह भी कहा कि स्कूल, कॉलेज और विश्वविद्यालय बच्चों के व्यक्तित्व और भविष्य को आकार देने में अहम भूमिका निभाते हैं। ऐसे में शैक्षणिक संस्थानों में नशे की बढ़ती समस्या को रोकने के लिए जागरूकता अभियान चलाए जाएंगे और सख्त नियम लागू किए जाएंगे।
छात्रों की समस्याओं को सुनने और उन्हें मार्गदर्शन देने के लिए काउंसलिंग सेंटर भी बनाए जाएंगे, जहां वे खुलकर अपनी बात रख सकेंगे।
आंध्र प्रदेश में भी तैयारी
इसी तरह N. Chandrababu Naidu की सरकार भी आंध्र प्रदेश में 13 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए सोशल मीडिया पर प्रतिबंध लगाने की तैयारी कर रही है। मुख्यमंत्री नायडू ने विधानसभा में इसकी जानकारी दी।
ऑस्ट्रेलिया में भी लागू हो चुका है ऐसा कानून
इससे पहले Australia सरकार ने नवंबर 2024 में ऑनलाइन सेफ्टी अमेंडमेंट बिल पारित कर 16 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए कई सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर रोक लगाने का प्रावधान किया था। इसमें प्लेटफॉर्म्स को नाबालिगों के अकाउंट हटाने और उम्र की सख्त जांच करने की जिम्मेदारी दी गई है।
हालांकि इस कानून को लेकर वहां अभिव्यक्ति की आजादी और डिजिटल अधिकारों को लेकर बहस भी जारी है।
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