अदालत ने अपने आदेश में बेहद तीखी टिप्पणी करते हुए कहा कि क्रूज चालक को नाव की गतिविधियों और खतरे का पूरा आभास था। इसके बावजूद, उसने संकट के समय यात्रियों को बचाने का प्रयास करने के बजाय उन्हें मौत के मुंह में छोड़ दिया और स्वयं की जान बचाकर भाग निकला। कोर्ट ने इसे समाज के लिए एक खतरनाक संकेत बताया और कहा कि यदि ऐसे मामलों में कड़ी कार्रवाई नहीं हुई, तो भविष्य में भी नाव या क्रूज संचालक ऐसी ही संवेदनहीनता दोहराएंगे।
इन धाराओं के तहत दर्ज होगा मुकदमा
न्यायालय ने बरगी थाना प्रभारी को निर्देश दिए हैं कि दोषियों के विरुद्ध भारतीय न्याय संहिता (BNS), 2023 की निम्नलिखित धाराओं में मामला दर्ज किया जाए:
धारा 106: लापरवाही से मृत्यु कारित करना।
धारा 110: आपराधिक मानव वध का प्रयास।
पुलिस को 2 दिन का अल्टीमेटम
कोर्ट ने पुलिस प्रशासन को किसी भी प्रकार की ढील न बरतने की चेतावनी दी है। आदेश में स्पष्ट किया गया है कि 02 दिन के भीतर प्राथमिकी (FIR) दर्ज कर अन्वेषण (जांच) शुरू की जाए और इसकी जानकारी लिखित में अदालत को सौंपी जाए। इस आदेश के बाद अब जांच की आंच केवल चालक तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि पर्यटन विभाग और क्रूज संचालन से जुड़े बड़े अधिकारियों तक भी पहुंच सकती है।
मदद करने वालों की सराहना
एक ओर जहां कोर्ट ने चालक दल को फटकार लगाई, वहीं दूसरी ओर उन जांबाज स्थानीय लोगों और राहगीरों की मुक्त कंठ से प्रशंसा की, जिन्होंने अपनी जान की परवाह किए बिना डूबते हुए लोगों को बचाने का प्रयास किया। अदालत ने उनके इस कार्य को मानवता का सच्चा उदाहरण बताया।
गौरतलब है की 30 अप्रैल 2026 की शाम करीब 5:30 से 6:30 बजे के बीच बरगी डैम के जलाशय में एक क्रूज अचानक अनियंत्रित होकर पलट गया था। इस भीषण हादसे में 13 लोगों की जल-समाधि हो गई थी। शुरुआती जांच में क्रूज की ओवरलोडिंग और चालक की लापरवाही मुख्य कारण के रूप में सामने आई थी। अब कोर्ट के दखल के बाद इस पूरे मामले की जांच न्यायपालिका की सीधी निगरानी में होगी।

