काला कोट पहन हाईकोर्ट पहुंचीं ममता, चुनावी हिंसा मामले में खुद की पैरवी सुनवाई के बाद लगे ‘बुआ चोर-भतीजा चोर’ के नारे, BCI ने भी मांगे वकालत के रिकॉर्ड

दैनिक सांध्य बन्धु (एजेंसी) नई दिल्ली। Mamata Banerjee गुरुवार को काला कोट पहनकर Calcutta High Court पहुंचीं, जहां उन्होंने चुनाव बाद हिंसा से जुड़े मामले में खुद अदालत के सामने दलीलें रखीं। यह मामला हाल ही में हुए पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनावों के बाद कथित हिंसा और बुलडोजर कार्रवाई से जुड़ी जनहित याचिका का था।

ममता बनर्जी चीफ जस्टिस सुजॉय पाल और जस्टिस पार्थसारथी सेन की बेंच के सामने पेश हुईं। उन्होंने अदालत को बताया कि चुनाव नतीजों के बाद राज्य में बड़े पैमाने पर हिंसा हुई है और पुलिस FIR दर्ज करने की अनुमति नहीं दे रही। ममता ने तृणमूल कांग्रेस कार्यकर्ताओं पर हमले, आगजनी और हत्याओं का आरोप लगाते हुए सुरक्षा और निष्पक्ष जांच की मांग की।

सुनवाई खत्म होने के बाद हाईकोर्ट परिसर में माहौल गरमा गया। कोर्ट रूम से बाहर निकलते समय वकीलों की भीड़ ने ममता बनर्जी के खिलाफ नारेबाजी शुरू कर दी। गलियारों में “बुआ चोर-भतीजा चोर” के नारे लगे, जिससे कुछ देर के लिए तनाव की स्थिति बन गई।

ममता सफेद साड़ी और काले कोट में वकीलों के बीच बैठीं नजर आईं। उनके साथ पार्टी नेता चंद्रिमा भट्टाचार्य और कल्याण बनर्जी भी मौजूद थे। अदालत में ममता ने कहा कि उनका नाम 1995 में वकील के तौर पर दर्ज हुआ था और उन्होंने अपना रजिस्ट्रेशन नियमित रूप से अपडेट कराया है।

इधर, Bar Council of India ने पश्चिम बंगाल बार काउंसिल को पत्र लिखकर ममता बनर्जी के एनरोलमेंट और वकालत से जुड़े रिकॉर्ड मांगे हैं। BCI ने प्रैक्टिस सर्टिफिकेट, निलंबन और एनरोलमेंट से संबंधित जानकारी दो दिन के भीतर उपलब्ध कराने को कहा है।

यह जनहित याचिका उत्तरपारा सीट से चुनाव हारने वाले उम्मीदवार शीर्षान्य बंद्योपाध्याय ने दायर की थी। याचिका में आरोप लगाया गया है कि चुनाव के बाद कई लोगों को तृणमूल कांग्रेस से जुड़े होने के कारण घर छोड़ने पर मजबूर होना पड़ा।

इससे पहले फरवरी में भी ममता बनर्जी Supreme Court of India में स्पेशल इंटेंसिव रिविजन (SIR) मामले की सुनवाई के दौरान खुद पेश हुई थीं। तब उन्होंने करीब 13 मिनट तक अपनी दलीलें रखी थीं। सुप्रीम कोर्ट के इतिहास में यह पहली बार माना गया था, जब किसी मौजूदा मुख्यमंत्री ने खुद कोर्ट में खड़े होकर पक्ष रखा हो।

ममता बनर्जी ने 1982 में कोलकाता यूनिवर्सिटी से LLB की पढ़ाई पूरी की थी और 1980 के दशक में कलकत्ता हाईकोर्ट में वकालत भी की थी। हालांकि बाद में वे सक्रिय राजनीति में पूरी तरह उतर गईं।

पश्चिम बंगाल में चुनाव बाद हिंसा को लेकर भाजपा और TMC दोनों आमने-सामने हैं। भाजपा का दावा है कि उसके कई कार्यकर्ताओं की हत्या हुई, जबकि TMC का कहना है कि हिंसा की 2 हजार से ज्यादा शिकायतें सामने आई हैं, लेकिन FIR दर्ज नहीं की गई।

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