दैनिक सांध्य बन्धु (एजेंसी) कटनी। कटनी जिले की ढीमरखेड़ा तहसील के अंतर्गत आने वाले जिर्री गांव और उसके आसपास के इलाकों में इन दिनों बाघ की आमद से भारी दहशत का माहौल है। पिछले दो दिनों (48 घंटों) में बाघ ने लगातार दो पालतू मवेशियों को अपना शिकार बनाया है। इस घटना के बाद से ग्रामीणों में इस कदर खौफ है कि लोगों ने शाम के समय घरों से बाहर निकलना और खेतों पर जाना पूरी तरह बंद कर दिया है।
ग्रामीण महेश यादव का आरोप है कि पहले ही दिन मवेशी के शिकार के बाद वन विभाग को इलाके में बाघ होने की सूचना दे दी गई थी। लेकिन शुरुआती तौर पर विभाग के कर्मचारियों ने इसे गंभीरता से नहीं लिया और क्षेत्र में बाघ की मौजूदगी से इनकार करते रहे।
दूसरे दिन जब बाघ ने एक और मवेशी को अपना निवाला बनाया और कुछ ग्रामीणों ने उसे प्रत्यक्ष रूप से देखा, तब जाकर वन अमला हरकत में आया। ग्रामीण उमेश यादव, अंतिमा यादव और लक्ष्मी यादव ने गहरी चिंता जताते हुए कहा कि यदि समय रहते बाघ को यहां से खदेड़ा नहीं गया, तो किसी इंसान पर भी हमला हो सकता है। ग्रामीणों ने केवल कागजी आश्वासन के बजाय जमीन पर ठोस सुरक्षा इंतजामों की मांग की है। शाम होते ही लोग हाथों में लाठी-डंडे लेकर अपनी सुरक्षा के लिए मजबूर हैं।
इस पूरे मामले को लेकर जब संबंधित क्षेत्र के रेंजर अजय मिश्रा से बात की गई, तो उन्होंने बताया कि प्रभावित इलाका 'वन विकास निगम' के कुंडम प्रोजेक्ट के अंतर्गत आता है। उन्होंने विभाग पर लग रहे सुस्ती के आरोपों को सिरे से खारिज किया।
रेंजर के मुताबिक, मामले की गंभीरता को देखते हुए प्रभावित गांवों में मुनादी (लाउडस्पीकर के जरिए घोषणा) करवाकर लोगों को सतर्क रहने की हिदायत दी गई है। वन विभाग का अमला लगातार क्षेत्र में पेट्रोलिंग कर रहा है। घटना की पूरी रिपोर्ट वरिष्ठ अधिकारियों को भेज दी गई है और जल्द ही ग्रामीणों की सुरक्षा के लिए और अधिक पुख्ता कदम उठाए जाएंगे।
